लगातार बेहतर विधिक सेवा करने वाले हर्ष मोहन सिंह हटे
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काफी लंबा कानूनी कैरियर रहा है उनका
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अब दोबारा निजी प्रैक्टिस की तरफ लौटेंगे
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तीन दर्जन वकीलों की टीम के नेता थे वह
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: देश की शीर्ष जांच एजेंसी, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के दिल्ली स्थित अभियोजन विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। सीबीआई दिल्ली के उप कानूनी सलाहकार और अभियोजन उप-निदेशालय के प्रमुख हर्ष मोहन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हर्ष मोहन सिंह का जाना एजेंसी के कानूनी ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने दिल्ली की अदालतों में अभियोजन की प्रक्रिया को आधुनिक और प्रभावी बनाने में लंबी सेवा दी है।
राउज एवेन्यू कोर्ट में अभूतपूर्व सफलता हर्ष मोहन सिंह दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई के अभियोजन ढांचे को सुदृढ़ करने के मुख्य सूत्रधार रहे हैं। वह 36 अनुभवी सरकारी वकीलों की एक बड़ी टीम का नेतृत्व कर रहे थे। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि पिछले साल दर्ज की गई, जब उनके कुशल पर्यवेक्षण और रणनीतिक मार्गदर्शन में सीबीआई ने रिकॉर्ड 167 मामलों का निपटारा सुनिश्चित किया। किसी एक वर्ष में राउज एवेन्यू कोर्ट जैसे महत्वपूर्ण न्यायिक केंद्र में इतने मामलों का निपटारा एजेंसी के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है।
एक व्यापक और अनुभवी करियर दिल्ली में कमान संभालने से पहले हर्ष मोहन सिंह का करियर देश के विभिन्न हिस्सों में फैला रहा। उन्होंने पटना, नई दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों में वरिष्ठ अभियोजक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। दिल्ली में उप कानूनी सलाहकार और अभियोजन प्रमुख नियुक्त होने से ठीक पहले, उन्होंने पंचकुला स्थित विशेष सीबीआई अदालतों में वरिष्ठ अभियोजक के रूप में कई हाई-प्रोफाइल मामलों को अंजाम तक पहुँचाया था। जटिल कानूनी दांव-पेचों को सुलझाने और भ्रष्टाचार विरोधी मामलों में उनकी पकड़ ने उन्हें एजेंसी के भीतर एक प्रो-एक्टिव अधिकारी की पहचान दिलाई।
अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए हर्ष मोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय अपने करियर के नए पड़ाव के लिए लिया है। उन्होंने बताया कि वह अब वकालत के क्षेत्र में निजी अभ्यास की ओर लौट रहे हैं। वे आगामी समय में चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगे। उनकी विशेषज्ञता केवल सीबीआई के मामलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों और अन्य गंभीर आपराधिक मुकदमों में अपनी कानूनी सेवाएं प्रदान करेंगे। उनका इस्तीफा न केवल उनके निजी करियर का विस्तार है, बल्कि यह उत्तर भारत के कानूनी हलकों में एक अनुभवी विशेषज्ञ की वापसी का संकेत भी है।