Breaking News in Hindi

सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार ने हलफनामा दायर किया

आईपैक कार्यालय पर ईडी की छापेमारी अवैध थी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आईपैक मामले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और प्रवर्तन निदेशालय के बीच कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में एक जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए ईडी की याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है। राज्य का तर्क है कि कोलकाता उच्च न्यायालय में पहले से ही इस संबंध में मामला लंबित है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में ईडी की याचिका का कोई औचित्य नहीं है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ईडी ने कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में साल्ट लेक स्थित आईपैक के कार्यालय और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर छापेमारी की थी। ईडी का आरोप है कि इस तलाशी अभियान के दौरान राज्य अधिकारियों और स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अवैध हस्तक्षेप किया और जांच प्रक्रिया में बाधा डाली। ईडी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

मंगलवार को न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पांचोली की पीठ के समक्ष राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा। हलफनामे में कहा गया है कि आईपैक प्रमुख के घर और कार्यालय पर बिना किसी पूर्व नोटिस के की गई छापेमारी संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है। सरकार का तर्क है कि ईडी को इस मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। इससे पहले 15 जनवरी को कोर्ट ने उन इलाकों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे जहाँ छापेमारी हुई थी। साथ ही, ईडी के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी।

आईपैक, जो राज्य सरकार की सलाहकार संस्था के रूप में कार्य करती है, पर छापेमारी की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुँची थीं। ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने तलाशी के दौरान दस्तावेज और लैपटॉप बाहर निकलवाए।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार की ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले ईडी का यह कदम उनकी चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों की सूची जैसे संवेदनशील दस्तावेजों को चुराने का एक प्रयास है। हालांकि, ईडी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कोयला तस्करी के अवैध धन लेनदेन की जांच से जुड़ी है।