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शंकराचार्य से अलंकार अग्निहोत्री ने आशीर्वाद प्राप्त किया

नौकरी इस्तीफा देने वाले प्रशासनिक अधिकारी वाराणसी पहुंचे

  • मौन व्रत पर है अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी

  • छह फरवरी तक सरकार को समय दिया

  • दिल्ली में बड़ा आंदोलन करने की तैयारी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अब सामाजिक और वैधानिक व्यवस्था के विरुद्ध एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट रहे अग्निहोत्री ने वाराणसी में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भेंट कर अपने आगामी संघर्ष के लिए आध्यात्मिक समर्थन और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मुलाकात के बाद उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी-एसटी एक्ट को निरस्त करने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखते हुए 6 फरवरी तक की समय सीमा तय की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून को समाप्त करने की घोषणा नहीं करती है, तो 7 फरवरी से देश भर के लोग दिल्ली की ओर प्रस्थान करेंगे। अग्निहोत्री का तर्क है कि यह कानून अब समाज को न्याय दिलाने के बजाय विभाजनकारी भूमिका निभा रहा है। उनके अनुसार, वह पिछले साढ़े तीन दशकों से इस कानून के दुरुपयोग और इससे उत्पन्न सामाजिक कटुता को करीब से देख रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि अलंकार अग्निहोत्री ने हाल ही में प्रशासनिक सेवा के प्रतिष्ठित पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। उनका दावा है कि नौकरशाही की कुर्सी छोड़ने का निर्णय यूजीसी के नए नियमों और केंद्र की कुछ विशिष्ट नीतियों के प्रति उनके विरोध का परिणाम था। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे एक व्यावसायिक इकाई की तरह संचालित होने का आरोप लगाया। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि वर्तमान व्यवस्था जनभावनाओं को समझने में विफल रही है।

वाराणसी के विद्यामठ में हुई इस मुलाकात के दौरान शंकराचार्य मौन व्रत पर थे, किंतु उन्होंने लिखकर अग्निहोत्री का कुशलक्षेम पूछा और उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया। अग्निहोत्री का मानना है कि इस धार्मिक पीठ से मिली स्वीकृति उनके आंदोलन को नैतिक और वैचारिक शक्ति प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में किसी भी बड़े सामाजिक परिवर्तन से पूर्व गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है। अब उनकी नजरें 6 फरवरी के घटनाक्रम पर टिकी हैं, जिसके बाद वे दिल्ली कूच की योजना को अंतिम रूप देंगे।