बजट में चुनावी रणनीति का खुलासा हो गया
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बंगाल और असम में बुनियादी ढांचे पर जोर
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दक्षिण भारत में खनिज और कृषि का समन्वय
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बजट पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं भी सामने आ गयी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का आम बजट केवल आर्थिक दस्तावेज न होकर, चुनावी राज्यों के लिए एक रणनीतिक रोडमैप के रूप में उभरकर सामने आया है। वर्तमान में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच, केंद्र सरकार ने इन क्षेत्रों के विकास और सामाजिक सरोकारों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण को आधार बनाकर पेश किए गए इस बजट में विकास के जरिए सत्ता की राह आसान करने की कोशिश की गई है।
भारतीय जनता पार्टी के लिए पश्चिम बंगाल और असम सामरिक और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बंगाल में ममता बनर्जी के राजनीतिक प्रभाव को चुनौती देने के लिए केंद्र ने बुनियादी ढांचे का जाल बिछाने की घोषणा की है। बजट में वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल लाइन और दानकुनी से सूरत तक एक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है। इससे न केवल माल ढुलाई सुगम होगी, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। इसके अतिरिक्त, दुर्गापुर को ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
वहीं, असम में अपनी सत्ता को बरकरार रखने और हैट्रिक लगाने के उद्देश्य से सरकार ने स्वास्थ्य और संस्कृति पर दांव लगाया है। तेजपुर में निमहांस 2 की स्थापना और पूर्वोत्तर के राज्यों (असम, सिक्किम, अरुणाचल आदि) के लिए बौद्ध सर्किट के विकास की योजना सीधे तौर पर क्षेत्रीय भावनाओं और जरूरतों को लक्षित करती है।
तमिलनाडु और केरल में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए मोदी सरकार ने विशिष्ट आर्थिक गलियारों की घोषणा की है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल को जोड़ते हुए रेयर अर्थ मिनरल्स कॉरिडोर (खनिज गलियारा) बनाने का प्रस्ताव है। तटीय राज्यों के किसानों के लिए नारियल, काजू और कोको जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना है, जिसे सियासी संजीवनी के तौर पर देखा जा रहा है।
पर्यटन के क्षेत्र में भी नवाचार करते हुए पुलिकट झील में बर्ड-वॉचिंग ट्रेल्स और केरल-कर्नाटक के तटीय इलाकों में टर्टल ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे। केरल के संदर्भ में, पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाने की घोषणा वहां के चिकित्सा पेशेवरों और नर्सिंग क्षेत्र के लिए बड़े अवसर पैदा करेगी। हालांकि, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं।
जहां भाजपा इसे विकासोन्मुखी बजट बता रही है, वहीं विपक्ष इसे महज एक चुनावी स्टंट करार दे रहा है। पुडुचेरी जैसे छोटे क्षेत्रों के लिए बड़ी घोषणाओं का अभाव खला, लेकिन कुल मिलाकर यह बजट चुनावी राज्यों के मतदाताओं को लुभाने और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने का एक प्रयास नजर आता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट की ये सौगातें चुनावों में मतों के रूप में कितनी तब्दील हो पाती हैं।
क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा?
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को ऐसे समय में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया, जब अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ को लेकर वैश्विक अनिश्चितता बढ़ रही है।
बजट प्रस्तावों में स्पष्ट किया गया है कि उपभोक्ताओं के लिए कौन सी चीजें सस्ती होंगी और किन क्षेत्रों पर महंगाई की मार पड़ेगी। सरकार ने खेल उपकरणों, चमड़े के सामान, कैंसर की दवाओं और सीफूड की लागत कम करने के लिए शुल्क मुक्त आयात और सीमा शुल्क छूट जैसे कदम उठाए हैं।
ये वस्तुएं हो सकती हैं सस्ती:
खेल उपकरण: वित्त मंत्री ने खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव रखा, जो खेल जगत में रोजगार और कौशल विकास पर केंद्रित होगा। इससे खेल उपकरणों की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार की उम्मीद है।
चमड़े का सामान: जूते के ऊपरी हिस्से के निर्यात के लिए भी अब कुछ विशिष्ट इनपुट्स पर शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई है।
कैंसर की दवाएं: मरीजों को बड़ी राहत देते हुए 17 कैंसर दवाओं पर बुनियादी सीमा शुल्क (BCD) पूरी तरह हटा दिया गया है। साथ ही, दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं और विशेष भोजन के व्यक्तिगत आयात पर भी छूट दी गई है।
सीफूड: मछुआरा समुदाय की सहायता के लिए क्षेत्रीय जल सीमा से परे पकड़ी गई मछलियों पर शुल्क मुक्त लाभ की घोषणा की गई है।
माइक्रोवेव ओवन: माइक्रोवेव के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विशिष्ट पुर्जों पर बुनियादी सीमा शुल्क से छूट दी गई है।
सोलर पैनल और ईवी बैटरी: सौर ग्लास बनाने में उपयोग होने वाले सोडियम एंटीमोनेट और लिथियम-आयन बैटरी सेल बनाने वाली मशीनों पर सीमा शुल्क छूट जारी रखने/हटाने का निर्णय लिया गया है, जिससे सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते हो सकते हैं।
व्यक्तिगत आयात: व्यक्तिगत उपयोग के लिए विदेश से लाए जाने वाले सभी कर योग्य सामानों पर आयात शुल्क 20प्रतिशत से घटाकर 10प्रतिशत कर दिया गया है।
विदेश यात्रा: विदेशी टूर पैकेज पर टीसीएस की दर को घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है (पहले यह 5प्रतिशत और 20प्रतिशत थी)। इससे विदेश यात्रा की बुकिंग के समय कम अग्रिम भुगतान करना होगा।
विदेश में शिक्षा और इलाज: एलआरएस के तहत शिक्षा और चिकित्सा उपचार के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर टीसीएस 5प्रतिशत से घटाकर 2प्रतिशत कर दिया गया है।
ये वस्तुएं हो सकती हैं महंगी:
ट्रेडिंग और शेयर बाजार: बायबैक टैक्स, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स और कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर टीसीएस में बदलाव के प्रस्ताव से ट्रेडिंग महंगी हो सकती है।
वीडियो गेम निर्माण: 1 अप्रैल से वीडियो गेम बनाने वाले पुर्जों पर सीमा शुल्क छूट वापस ले ली जाएगी, जिससे गेमिंग कंसोल महंगे हो सकते हैं।
कॉफी: कॉफी रोस्टिंग, ब्रूइंग और वेंडिंग मशीनों पर मिलने वाली छूट 2 फरवरी से हटा ली गई है। इससे कैफे और कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाली आयातित कॉफी मशीनें महंगी हो जाएंगी।
आयातित शराब: मानव उपभोग के लिए शराब की बिक्री पर टीसीएस की दर को तर्कसंगत बनाकर 2प्रतिशत करने का प्रस्ताव है (वर्तमान में यह 1प्रतिशत है)।
गलत टैक्स रिपोर्टिंग: यदि कोई करदाता टैक्स कम दिखाता है, तो उसे पेनाल्टी से बचने के लिए अब बकाया टैक्स और ब्याज के साथ 100प्रतिशत अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा।