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ग्वालियर: यूनिवर्सिटी की एक चूक और छात्रों का सपना टूटा! क्रॉस कंट्री रेस की सूचना न मिलने से खिलाड़ियों में भारी रोष

ग्वालियर: एक तरफ मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों का भविष्य दिशा देने के लिए ‘खेलो एमपी’ जैसे अभियानों पर समय और करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. तो वहीं दूसरी तरफ ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय का खेल विभाग इन्हीं दावों की धज्जियां उड़ाने में जुटा हुआ है. आरोप है कि, विश्वविद्यालय ने संभागीय स्तर के एक कार्यक्रम की सूचना आखिरी वक्त पर सार्वजनिक की, जिसके चलते तमाम खिलाड़ी इस आयोजन में हिस्सा लेने से चूक गए.

आयोजन से महज 15 घंटे पहले जारी की सूचना
शनिवार सुबह 6 बजे से जीवाजी विश्वविद्यालय के खेल विभाग द्वारा महिला-पुरुष क्रॉस कंट्री कंपीटिशन का आयोजन होना था. लेकिन इस जिम्मेदारों ने ग्वालियर चंबल अंचल के कॉलेजों को इस आयोजन से महज 15 घंटे पहले इसके बारे में सूचित किया. 31 जनवरी को सुबह 6 बजे महादजी सिंधिया खेल परिसर में प्रस्तावित इस प्रतियोगिता की आधिकारिक सूचना विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा 30 जनवरी को दोपहर करीब 3 बजे कॉलेजों को भेजी गई.

कई कॉलेजों के छात्र हिस्सा लेने से चूके
इस परिस्थिति और प्रबंधन की लापरवाही से इतने कम समय में न तो खिलाड़ियों के दस्तावेजों का सत्यापन संभव था न किट की व्यवस्था और न ही अभ्यास की तैयारी. ऐसे नतीजा यह रहा कि संभाग के आधे से अधिक कॉलेजों प्रतियोगिता में भाग ही नहीं लिया. क्योंकि आसपास के जिलों जिनमें भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया और शिवपुरी जैसे क्षेत्रों से आने वाली खिलाड़ियों की टीमों को न केवल यात्रा की व्यवस्था करनी पड़ती है बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस और ठहरने का भी इंतजाम करना पड़ता है. ऐसे में आयोजन से महज 15 घंटे पहले सूचना देकर खेल विभाग ने उन प्रतिभावान खिलाड़ियों का रास्ता बंद कर दिया है जो जिले से बाहर रहते हैं.

इससे पहले भी बनी थी ऐसी ही स्थिति
जीवाजी यूनिवर्सिटी की यह कोई पहली चूक नहीं है, हाल ही में कुछ समय पहले आयोजित हुई सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता के लिए भी छुट्टी से ठीक पहले पत्र जारी किया गया था. जिसके चलते कई टीमें मैदान तक नहीं पहुंच सकी थीं. लेकिन बार-बार हो रही इन गलतियों के बावजूद न तो किसी की जिम्मेदारी तय हुई और न ही व्यवस्था में सुधार आया है.

लापरवाही पर होगी जांच!
जब इस मामले में जीवाजी विश्वविद्यालय के खेल विभाग में पदस्थ अधिकारी संजय कुलश्रेष्ठ से संपर्क किया तो उन्होंने यूनिवर्सिटी से बाहर होने का हवाला दे दिया. हालांकि विश्वविद्यालय के समन्वयक डॉ. विमलेंद्र सिंह राठौर का कहना है कि, ”ये मामला उनके संज्ञान में आया है. इस मामले को लेकर कुलगुरु को भी अवगत कराया है. आखिर किन कारणों से ऐसी परिस्थिति बनी और छात्रों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ा इसको लेकर जांच कर कार्रवाई की जाएगी.”