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ट्रंप के बयान का ब्रिटिश पीएम ने जोरदार विरोध किया

अफगानिस्तान में नाटो सैनिकों की कुर्बानी भी थी

लंदनः ब्रिटेन और अमेरिका के बीच कूटनीतिक दरार तब और गहरी हो गई जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अफगानिस्तान युद्ध से जुड़ी टिप्पणियों की कड़े शब्दों में निंदा की। स्टार्मर ने ट्रंप के बयानों को अपमानजनक करार दिया है।

यह विवाद गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को दावोस (स्विट्जरलैंड) में ट्रंप के एक साक्षात्कार से शुरू हुआ। फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने नाटो सहयोगियों के योगदान को कमतर बताते हुए कहा कि अफगानिस्तान युद्ध के दौरान गैर-अमेरिकी सैनिक फ्रंटलाइन से थोड़ा पीछे रहे थे। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका को वास्तव में कभी नाटो सहयोगियों की जरूरत नहीं पड़ी।

वे कहेंगे कि उन्होंने अफगानिस्तान में कुछ सैनिक भेजे… और उन्होंने भेजे भी, लेकिन वे अग्रिम मोर्चे से थोड़ा पीछे, थोड़ा हटकर रहे।

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने शुक्रवार को एक वीडियो संदेश जारी कर ट्रंप को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने अफगानिस्तान में शहीद हुए 457 ब्रिटिश सैन्य कर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इन सैनिकों के बलिदान पर सवाल उठाना उन परिवारों का अपमान है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है।

स्टार्मर ने स्पष्ट रूप से कहा, 9/11 हमलों के बाद नाटो के इतिहास में पहली बार सामूहिक रक्षा प्रावधान को लागू किया गया था, और ब्रिटेन कंधे से कंधा मिलाकर अमेरिका के साथ खड़ा रहा। 20 वर्षों तक चले इस युद्ध में 1,50,000 से अधिक ब्रिटिश कर्मियों ने सेवा दी, जिनमें से सैकड़ों शहीद हुए और हजारों गंभीर रूप से घायल हुए। स्टार्मर ने संकेत दिया कि ट्रंप को अपने गलत बयानों के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, अगर मैंने इस तरह की कोई गलत बात कही होती, तो मैं निश्चित रूप से माफी मांगता।

ब्रिटेन में यह आक्रोश किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं रहा। विपक्षी नेता केमी बैडेनोच ने भी ट्रंप की टिप्पणी को बकवास बताया, जबकि प्रिंस हैरी ने भी बिना नाम लिए कहा कि सैनिकों के बलिदान के बारे में सच्चाई और सम्मान के साथ बात की जानी चाहिए। वेटरन्स संगठनों ने भी ट्रंप की वियतनाम युद्ध के दौरान सेना में न जाने के इतिहास को याद दिलाते हुए उनकी आलोचना की।

व्हाइट हाउस ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा है कि ट्रंप अपनी बात पर कायम हैं और अमेरिका का नाटो में योगदान अन्य सभी देशों के कुल योग से कहीं अधिक है। यह घटनाक्रम ग्रीनलैंड विवाद और टैरिफ युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच तनाव की एक नई कड़ी बन गया है।