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बिगड़ती अर्थव्यवस्था को संभालने में आगे आया रिजर्व बैंक

बैंकिंग प्रणाली में दो लाख करोड़ निवेश की तैयारी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकिंग प्रणाली में 2 लाख करोड़ रुपये डालने का निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 24 जनवरी 2026 को जारी इस वित्तीय योजना का मुख्य उद्देश्य बाजार में छायी नकदी की किल्लत को समाप्त करना है, ताकि विकास की गति बाधित न हो।

बाजार में पैसे की इस अचानक कमी के पीछे कई बड़े कारक जिम्मेदार हैं। जनवरी और फरवरी के महीने वित्तीय वर्ष के अंत की ओर होते हैं। इस दौरान कॉरपोरेट जगत द्वारा अग्रिम कर और व्यापारियों द्वारा भारी जीएसटी का भुगतान किया जाता है। यह पैसा वाणिज्यिक बैंकों से निकलकर सीधे सरकार के खातों में चला जाता है, जिससे बैंकों के पास दैनिक कामकाज के लिए नकदी कम पड़ जाती है।

भारतीय बैंकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि लोग निवेश के अन्य विकल्पों (जैसे म्यूचुअल फंड) की ओर भाग रहे हैं, जिससे बैंकों में जमा राशि की वृद्धि धीमी हो गई है। इसके उलट, उद्योगों और व्यक्तिगत उपभोक्ताओं की तरफ से कर्ज की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है। रुपये की गिरती कीमत को संभालने के लिए जब आरबीआई बाजार में डॉलर बेचता है, तो वह बदले में बाजार से रुपये सोख लेता है। इससे भी घरेलू बाजार में रुपये की कमी हो जाती है।

इस कमी को दूर करने के लिए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया है। फरवरी में आरबीआई 1,00,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदेगा। जब आरबीआई बॉन्ड खरीदता है, तो वह सीधे बैंकों के हाथों में नकद पैसा थमा देता है। 10 बिलियन डॉलर का बाय सेल स्वैप एक रणनीतिक कदम है। इसमें आरबीआई बैंकों से डॉलर खरीदकर तत्काल बाजार में रुपये की तरलता बढ़ाएगा। 30 जनवरी को 25,000 करोड़ रुपये का वीआरआर ऑपरेशन बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराएगा, जिससे तत्काल फंड की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

इस कदम का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बाजार में ब्याज दरें स्थिर रहेंगी। यदि नकदी की कमी बनी रहती, तो बैंक अपनी जमा दरों और लोन की दरों में बढ़ोतरी कर देते, जिससे आम आदमी के लिए ईएमआई महंगी हो जाती। पर्याप्त नकदी होने से बैंक उद्योगों को सस्ता ऋण दे पाएंगे, जिससे उत्पादन और रोजगार में वृद्धि होगी। आरबीआई का यह सक्रिय रुख दर्शाता है कि वह आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।