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पच्चासी साल के बुजुर्ग साधु को भी पीटा गया

शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार पर देश भर से प्रतिक्रिया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम तट पर भारी भीड़ के बीच एक दुखद घटना सामने आई है। 85 वर्षीय एक बुजुर्ग पुजारी ने आरोप लगाया है कि रविवार को पुलिस कर्मियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। यह घटना उस समय हुई जब प्रशासन ने भीड़ के दबाव और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की रथ यात्रा को संगम की ओर जाने से रोक दिया था।

प्रेस से बात करते हुए बुजुर्ग साधु ने अपने शरीर पर लगी चोटों का जिक्र किया और भावुक होते हुए कहा, मुझे जूतों से कुचला गया और बहुत बुरी तरह मारा गया है। अगर वे दोबारा मारते तो मैं मर ही जाता। पुजारी के अनुसार, यह हमला तब हुआ जब पुलिस कर्मियों ने शंकराचार्य के रथ को स्नान के लिए आगे बढ़ने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया।

विवाद तब शुरू हुआ जब प्रशासन ने शंकराचार्य से रथ से उतरकर पैदल चलने का अनुरोध किया। समर्थकों द्वारा इस पर आपत्ति जताए जाने के बाद पुलिस और वहां मौजूद लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।

प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस सूत्रों का कहना है कि मौनी अमावस्या पर भारी भीड़ के कारण सुरक्षा कारणों से कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे। अनुमान के मुताबिक, रविवार दोपहर तक लगभग 1.9 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई थी। इतनी बड़ी संख्या को नियंत्रित करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अजय पाल शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। हालांकि, विवाद के बाद शंकराचार्य ने स्नान करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उन्हें अनुष्ठान करने से रोका है, जिसके बाद वे बिना स्नान किए ही वापस लौट गए।

बुजुर्ग पुजारी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर अभी तक पुलिस या मेला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि क्या इस कथित मारपीट की कोई उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। फिलहाल, इस घटना ने संगम के शांतिपूर्ण माहौल में तनाव पैदा कर दिया है। दूसरी तरफ घटना के वीडियो सार्वजनिक होने के बाद देश भर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आने लगी है।