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पड़ोसी देशों के अमेरिकी ठिकानों पर दो टूक चेतावनी

हमला हुआ तो वहां भी कार्रवाई होगीः ईरान

  • कई पड़ोसी देशों में सैन्य ठिकाने

  • ट्रंप ने आंदोलन को भड़काया भी है

  • देश के भीतर भी दमन चक्र जारी

तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। बुधवार, 14 जनवरी 2026 को ईरान ने अपने पड़ोसी देशों को एक कड़क और स्पष्ट चेतावनी जारी की है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यदि अमेरिका ईरान पर कोई सैन्य हमला करता है, तो ईरान उन पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा जिन्होंने उन्हें शरण दे रखी है।

ईरान ने विशेष रूप से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देशों को आगाह किया है। तेहरान ने इन देशों से कहा है कि वे वाशिंगटन को ईरान पर हमला करने से रोकें, अन्यथा युद्ध की स्थिति में उनकी धरती पर मौजूद अमेरिकी बेस सुरक्षित नहीं रहेंगे। ईरान का कहना है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। यह तनाव ईरान में जारी राष्ट्रव्यापी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच बढ़ा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए संकेत दिया है कि अमेरिका प्रदर्शनों को दबाने के लिए की जा रही हिंसा को रोकने हेतु हस्तक्षेप कर सकता है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, ईरान में जारी अशांति में अब तक करीब 2,600 लोगों की जान जा चुकी है, जिसे दबाने के लिए ईरानी सुरक्षा बल कड़े कदम उठा रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री और अमेरिकी विशेष दूत के बीच होने वाली सीधी बातचीत भी फिलहाल निलंबित कर दी गई है। ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियों को चरम पर बताते हुए कहा है कि उसके मिसाइल भंडार और ड्रोन हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दूसरी ओर, कतर में स्थित मध्य पूर्व के सबसे बड़े अमेरिकी बेस अल उदेद से कुछ कर्मियों को हटने की सलाह दी गई है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह धमकी वास्तव में पड़ोसी देशों पर दबाव बनाने की रणनीति है ताकि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने दें। यदि संघर्ष छिड़ता है, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस सकता है।