सफाई कर्मचारियों को बहाली का भरोसा
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निजी कंपनी को ठेका देने से विवाद
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करीब दो हजार लोगो बर्खास्त हुए थे
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मंत्री और मेयर ने दिया है उन्हें भरोसा
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः चेन्नई में पिछले साढ़े पांच महीनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के सफाई कर्मचारियों ने आखिरकार अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। 165 दिनों तक चले इस विरोध प्रदर्शन में 57 दिनों की लंबी भूख हड़ताल भी शामिल थी। सोमवार को हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री पीके सेकर बाबू और चेन्नई की मेयर आर प्रिया ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि जनवरी के अंत तक उन्हें काम पर वापस ले लिया जाएगा।
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब कॉर्पोरेशन ने रॉयपुरम और थिरु वि का नगर क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन का काम एक निजी कंपनी को सौंप दिया था। यूनियनों का दावा है कि इसके कारण 1,952 कर्मचारियों को अवैध रूप से बर्खास्त कर दिया गया था। बेरोजगार हुए ये कर्मचारी पिछले छह महीनों से आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, और इस संघर्ष के दौरान चार सफाई कर्मचारियों की मौत भी हो गई। मंत्री सेकर बाबू ने भूख हड़ताल पर बैठी महिला कर्मचारी एस लक्ष्मी को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया और वादा किया कि 30 जनवरी तक बहाली की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
आंदोलन के दौरान सफाई कर्मचारियों ने कई रचनात्मक और मार्मिक विरोध प्रदर्शन किए, जिनमें सड़कों पर झाड़ू लगाना, सचिवालय तक मार्च करना और यहां तक कि श्मशान घाटों में सोकर अपना विरोध दर्ज कराना शामिल था। कर्मचारियों की मांग थी कि उन्हें फिर से कॉर्पोरेशन के अधीन लिया जाए और उनके वेतनमान को बहाल किया जाए। इस सफलता को उझईपुर उरीमई अयक्कम के अध्यक्ष के भारती ने जीत का पहला दौर बताया है। 15 वर्षों से सेवा दे रही एक कर्मचारी जे गीता ने भावुक होकर बताया कि कैसे पिछले छह महीनों में उन्हें अपने परिवार का पेट पालने के लिए कर्ज लेना पड़ा। सरकार के इस कदम से आगामी पोंगल के त्योहार पर हजारों परिवारों के घरों में खुशियां लौटने की उम्मीद है।