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आतंकी संपर्क के कारण सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

जांच पूरी कर लेने के बाद जम्मू कश्मीर सरकार का फैसला

  • अब तक कुल 85 कर्मचारी दंडित

  • एक शिक्षक एलईटी के संपर्क में था

  • बाकी लोगों की भी आतंकी कनेक्शन थे

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को एक कड़ा फैसला लेते हुए आतंकी संगठनों से कथित संबंधों के कारण पांच सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। साल 2020 के बाद से अब तक प्रशासन लगभग 85 कर्मचारियों को इसी आधार पर हटा चुका है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सरकारी संस्थानों के भीतर पैठ बना चुके आतंकी इकोसिस्टम की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ फेंकना है।

इन कर्मचारियों की बर्खास्तगी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत की गई है। यह विशेष प्रावधान राष्ट्रपति या राज्यपाल/उपराज्यपाल को यह अधिकार देता है कि यदि वे राज्य की सुरक्षा के हित में संतुष्ट हैं, तो वे किसी भी सिविल सेवक को बिना औपचारिक विभागीय जांच के पद से हटा सकते हैं। बर्खास्त किए गए लोगों में एक शिक्षक मोहम्मद इशफाक, लैब तकनीशियन तारिक अहमद शाह, सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर, वन विभाग का फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट और स्वास्थ्य विभाग का ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ शामिल हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के डॉसियर के अनुसार, शिक्षक मोहम्मद इशफाक पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ ​​अबू खुबैब के सीधे संपर्क में था। उसे 2022 की शुरुआत में डोडा में एक पुलिस अधिकारी की हत्या का काम सौंपा गया था, लेकिन योजना को अंजाम देने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं, अन्य कर्मचारी जैसे तारिक अहमद और फारूक भट लंबे समय से हिजबुल मुजाहिदीन के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) के रूप में काम कर रहे थे। प्रशासन का मानना है कि सरकारी तंत्र में छिपे ऐसे तत्व न केवल खुफिया जानकारी साझा करते हैं, बल्कि आतंकियों को रसद और सुरक्षित पनाहगाह भी मुहैया कराते हैं। यह कार्रवाई घाटी में आतंकवाद के खिलाफ जारी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।