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ईडी की छापामारी को डेटा चोरी करार दिया टीएमसी महासचिव ने

सिर्फ कोलकाता के डायरेक्टर पर ही छापा क्यों

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने नया सवाल उठाकर ईडी को नये सिरे से कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा पिछले तीन साल से इस कोयला चोरी के मामले में जांच एजेंसी सोती रही। अब चुनाव करीब आया तो अचानक से ऐसी सक्रियता क्यों बढ़ी।

उन्होंने कहा, प्रतीक जैन के अलावा आई-पैक संस्था के दो और डायरेक्टर हैं। कोयला घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने उनके घरों पर तलाशी क्यों नहीं ली? सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने यह सवाल उठाया। ममता बनर्जी के बाद अब अभिषेक ने भी केंद्रीय जांच एजेंसी पर डेटा चोरी करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

कोलकाता के मिलन मेला प्रांगण में एक डिजिटल कॉन्क्लेव के दौरान अभिषेक ने कहा कि ईडी का मुख्य उद्देश्य तृणमूल का डेटा चुराना था। उन्होंने तर्क दिया, ईडी कोयला घोटाले की जांच के नाम पर आई थी, जिस मामले में पिछले तीन साल से किसी को समन तक नहीं भेजा गया। वे आ सकते हैं, लेकिन उनका असली मकसद जानकारी चुराना था।

उन्होंने आगे पूछा कि आई-पैक के तीन डायरेक्टर्स में से एक कोलकाता, एक हैदराबाद और एक दिल्ली में रहता है, तो केवल कोलकाता वाले डायरेक्टर को ही क्यों चुना गया? और अगर जांच डायरेक्टर के घर की थी, तो ईडी आई-पैक के दफ्तर क्यों गई?

इससे पहले शुक्रवार को नदिया की एक जनसभा में अभिषेक ने आरोप लगाया था कि आई-पैक ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया और दीदीर दूत ऐप के जरिए तृणमूल की मदद की, इसीलिए उन्हें ईडी की छापेमारी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ईडी के जरिए लोकतंत्र का गला घोंट रही है और चुनाव आयोग के जरिए लोगों के अधिकार छीन रही है।

ममता बनर्जी ने भी आई-पैक दफ्तर में छापेमारी के दौरान वहां पहुंचकर कड़ा विरोध जताया था। उस समय मुख्यमंत्री वहां से कुछ फाइलें और लैपटॉप लेकर बाहर निकली थीं, जिसके बाद ईडी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने उनकी जांच में बाधा डाली और सबूतों के साथ वहां से चली गईं। यह मामला अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। जहां ईडी ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, वहीं राज्य सरकार ने भी कैविएट दाखिल की है ताकि कोई भी आदेश देने से पहले उनका पक्ष सुना जाए।

सोमवार को अभिषेक ने मुख्यमंत्री के कदम का समर्थन करते हुए कहा, उन्होंने (ममता) उसी भाषा में जवाब दिया है जिस भाषा में वे बात करते हैं। दूसरे राज्यों में धमकाकर पार्टियां बदलवाई जाती हैं, लेकिन वे यहाँ ऐसा नहीं कर पाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी छापेमारी केवल राजनीतिक डेटा हासिल करने की एक साजिश थी।