एसआईआर पर तृणमूल की याचिका पर कार्रवाई
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अदालत ने आयोग से इस मामले पर जवाब मांगा है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ में एसआईआर से जुड़े मामले की सुनवाई हुई।
तृणमूल के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन ने एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था। अदालत में उनकी ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने दावा किया कि आयोग सोशल मीडिया के जरिए निर्देश दे रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ स्तर के अधिकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से एसआईआर संबंधी कार्यों के निर्देश दिए जा रहे हैं। तृणमूल ने आयोग की तथ्यात्मक विसंगति सूची पर भी सवाल उठाए। सिब्बल का दावा है कि पश्चिम बंगाल के कई मतदाताओं को अनुचित तरीके से चिह्नित कर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।
डेरेक और अन्य सांसदों ने अपनी याचिका में एसआईआर को लेकर आयोग की मनमानी और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाया है। याचिका में ‘व्हाट्सएप संदेशों’ का भी जिक्र किया गया है और आरोप लगाया गया है कि आयोग कानून के विरुद्ध काम कर रहा है। सोमवार की सुनवाई के दौरान आयोग ने जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने आयोग को केवल एक सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गंगासागर में एक कार्यक्रम के दौरान एसआईआर के मुद्दे पर कड़ा विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि एसआईआर सुनवाई के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अब तक पांच पत्र लिखे हैं। अपने ताजा पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि कई मतदाताओं द्वारा दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके नाम काटे जा रहे हैं और सुनवाई के दौरान दस्तावेज जमा करने की कोई रसीद या प्रमाण नहीं दिया जा रहा है।