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भारत पर भरोसा बनाए रखें: पीएम मोदी

साल के अंतिम दिन प्रधानमंत्री ने फिर सपना दिखाया

  • प्रमुख आर्थिक और संस्थागत सुधार

  • व्यापार सुगमता और निवेश को प्रोत्साहन

  • सामाजिक सुरक्षा और श्रम सुधार पर बोले

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 को भारत के आर्थिक और सामाजिक इतिहास में एक मील का पत्थर घोषित किया है। पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर साझा किए गए अपने एक विस्तृत लेख में, प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान में जारी नीतिगत बदलाव भारत को विकसित भारत बनाने की दिशा में निर्णायक गति प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और निवेशकों का आह्वान करते हुए कहा कि यह समय भारत की युवा शक्ति और यहाँ के लोगों के अदम्य साहस पर भरोसा करने का है।

प्रधानमंत्री ने 2025 को निरंतर सुधारों के मिशन के रूप में परिभाषित किया। इस वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) का सरलीकरण प्रमुख रहा। सरकार ने जटिल कर ढांचों को हटाकर इसे मुख्य रूप से 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब में व्यवस्थित किया है। इसका उद्देश्य न केवल कर विवादों को कम करना है, बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर अनुपालन का बोझ कम करना भी है।

मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए, सरकार ने आयकर अधिनियम 1961 को आधुनिक आयकर अधिनियम 2025 से प्रतिस्थापित किया है। अब 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले व्यक्तियों को कोई आयकर नहीं देना होगा, जो कि कर प्रशासन में पारदर्शिता और तकनीक के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए छोटी कंपनियों की परिभाषा का विस्तार किया गया है। अब 100 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली फर्मों को लघु उद्योगों की श्रेणी में रखा गया है, जिससे उन्हें जटिल नियमों से मुक्ति मिली है। वित्तीय सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है। साथ ही, सेबी के कामकाज को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिभूति बाजार कोड विधेयक पेश किया गया है।

श्रम क्षेत्र में सरकार ने 29 पुराने कानूनों को चार आधुनिक श्रम संहिताओं में समेकित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य असंगठित और अनुबंध श्रमिकों को ईएसआईसी और ईपीएफओ जैसी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना और महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाना है। प्रधानमंत्री ने निष्कर्ष निकाला कि 2025 के ये सुधार नियंत्रण के बजाय सहयोग और विनियमन के बजाय सरलीकरण पर आधारित हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत अब केवल बदलाव की बात नहीं कर रहा, बल्कि रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार होकर तीव्र क्रियान्वयन और गहरी तब्दीली के युग में प्रवेश कर चुका है।