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अमित शाह को उनके अपने बयान पर घेरा टीएमसी ने

घुसपैठ के लिए आखिर कौन जिम्मेदार बताएं

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र बन गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कोलकाता दौरे के दौरान तृणमूल कांग्रेस के उन आरोपों का कड़ा जवाब दिया, जिनमें सीमा सुरक्षा बल को घुसपैठ के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा था।

शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि घुसपैठ को रोकना केवल बीएसएफ का काम नहीं है, बल्कि इसके लिए राज्य सरकार के सहयोग की भी आवश्यकता होती है। दूसरी तरफ टीएमसी ने उल्टा सवाल किया कि फिर बीएसएफ की जिम्मेदारी क्या है, जो सीधे अमित शाह के नियंत्रण में है।

अमित शाह ने खुलासा किया कि उन्होंने सीमा पर फेंसिंग (बाड़ लगाने) के लिए जमीन की मांग करते हुए बंगाल सरकार को सात पत्र लिखे हैं और केंद्रीय गृह सचिव ने राज्य के मुख्य सचिव से तीन बार मुलाकात की है, लेकिन ममता सरकार ने जमीन उपलब्ध नहीं कराई। शाह ने सवाल उठाया, ममता जी, आज मैं आपसे एक सीधा सवाल पूछना चाहता हूँ।

कौन सी सरकार सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन देने से इनकार करती है? यह आपकी सरकार है जो घुसपैठियों के लिए दरवाजे खोलकर रखना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि त्रिपुरा और असम में घुसपैठ पूरी तरह रुक गई है क्योंकि वहां की सरकारें सहयोग कर रही हैं, जबकि बंगाल में यह टीएमसी के वोट बैंक की राजनीति के कारण जारी है। दूसरी तरफ टीएमसी ने कहा झारखंड चुनाव में भी यही मुद्दा उठाया गया था तो अमित शाह बताएं कि झारखंड और बिहार में कितने घुसपैठिये मिले हैं।

शाह ने घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए कहा कि घुसपैठियों के पास से बंगाल में बने सरकारी दस्तावेज बरामद हो रहे हैं, जो पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने बंगाल की जनता से अपील की कि यदि वे राज्य की जनसांख्यिकी (demography) और सुरक्षा की रक्षा करना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसी सरकार चुननी होगी जो सीमाओं को पूरी तरह सील कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी जानबूझकर बंगाल की संस्कृति और सुरक्षा से समझौता कर रही हैं। यह विवाद आने वाले चुनावों में एक निर्णायक मुद्दा बनने की संभावना है।