Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jabalpur News: पूर्व मंत्री हरेंद्रजीत सिंह बब्बू को फिर मिली जान से मारने की धमकी; गोरखपुर थाने में... Supreme Court on Kerala Elephant: केरल के सबसे ऊंचे हाथी 'रमन' की कस्टडी पर SC का बड़ा आदेश; व्यावसा... Faridabad News: खुले में कूड़ा फेंका तो लगेगा 50 हजार का जुर्माना; नगर निगम फरीदाबाद का बड़ा एक्शन Rajasamand News: प्री-वेडिंग फोटोशूट के दौरान बड़ा हादसा; कुंड में डूबने से युवक की मौत, मंगेतर के सा... Vaibhav Sooryavanshi Batting: अफगानिस्तान ए के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी का तूफान; 200 की स्ट्राइक रेट से... Welcome to the Jungle Trailer: अक्षय कुमार की फिल्म के ट्रेलर लॉन्च पर खर्च हुए 1.5 करोड़; जानें क्यो... Mahendra Makhijani Arrested: अमेरिका में भारतीय मूल के महेंद्र माखीजानी 955 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी क... Ethanol Blending News: पेट्रोल होगा सस्ता! E22-E30 फ्यूल पर सरकार ने खत्म की एक्साइज ड्यूटी, जानें क... WhatsApp Support Ending: जल्द इन पुराने iPhone और Android फोन पर बंद हो जाएगा WhatsApp; जानें क्या ह... Parama Ekadashi 2026: आज है परमा एकादशी; भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए लगाएं इन खास चीजों का भ...

अंतर्राष्ट्रीय आलोचना से बचने के लिए जुंटा सरकार का खेल

म्यांमार में 5 साल बाद दिखावे का चुनाव

  • सैन्य समर्थक पार्टी ही मैदान में

  • शेष दलों ने इससे दूरी बनायी है

  • सैन्य शासन को नया रुप देने की कोशिश

बैंकॉकः म्यांमार में रविवार को कड़ी सुरक्षा और प्रतिबंधों के बीच मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई। सत्तारूढ़ सैन्य जुंटा इस अभ्यास को लोकतंत्र की वापसी के रूप में प्रचारित कर रहा है। गौरतलब है कि पांच साल पहले सेना ने निर्वाचित सरकार का तख्तापलट कर दिया था, जिसके बाद देश भीषण गृहयुद्ध की चपेट में आ गया था।

इस चुनाव में पूर्व नागरिक नेता आंग सान सू की अनुपस्थित हैं, जो फिलहाल जेल में हैं। उनकी लोकप्रिय पार्टी को भी सेना द्वारा भंग कर दिया गया है, जिस कारण वह चुनाव में भाग नहीं ले पा रही है। इससे साफ है कि सैन्य शासन सिर्फ दिखावे के लिए इस चुनाव का आयोजन कर रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पश्चिमी राजनयिकों और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने इस एक महीने तक चलने वाले मतदान की निंदा की है।

उनका कहना है कि यह चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से सेना के सहयोगियों के पक्ष में झुकी हुई है और इसमें असहमति जताने वालों पर भारी कार्रवाई की जा रही है। आलोचकों का मानना है कि यह चुनाव केवल सैन्य शासन को एक नया रूप देने की कोशिश है। उम्मीद की जा रही है कि सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी, क्योंकि अधिकांश विपक्षी दल या तो प्रतिबंधित हैं या चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं।

म्यांमार के कई हिस्सों में अभी भी जुंटा सेना और जातीय विद्रोही समूहों के बीच संघर्ष जारी है, जिससे कई क्षेत्रों में मतदान कराना असंभव हो गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन चुनावों की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जानकारों का कहना है कि सू की और उनकी पार्टी की अनुपस्थिति में यह चुनाव समावेशी नहीं हो सकते। म्यांमार की जनता के बीच भी इस चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहुत कम उत्साह देखा गया, और मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या काफी कम रही। यह चुनाव म्यांमार के भविष्य और वहां लोकतंत्र की बहाली की संभावनाओं पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है।