Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Nuh News: नूंह दौरे पर पहुंचे राज्यपाल असीम घोष; स्थानीय समस्याओं को लेकर दिखे गंभीर, अधिकारियों को ... Police Encounter: पंचकूला पुलिस की बड़ी कार्रवाई; करनाल में वारदात से पहले नोनी राणा गैंग के दो बदमाश... Bhiwani News: भिवानी में नशा मुक्ति केंद्र पर सीएम फ्लाइंग का छापा; बंधक बनाकर रखे गए 40 से अधिक युव... Rewari Police Action: रेवाड़ी पुलिस की बड़ी कामयाबी; डिजिटल अरेस्ट कर 1.89 करोड़ ठगने वाले 4 साइबर अ... Sonipat Police Firing: सोनीपत में पुलिस फायरिंग! INSO छात्र को गोली मारने का आरोप; तनाव के बीच जांच ... Ballabhgarh Murder Case: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की थी महिला की हत्या; बल्लभगढ़ पुलिस ने आरोप... Faridabad Viral Video: फरीदाबाद में बुजुर्ग महिला की बेरहमी से पिटाई; वकील की बेटी ने जड़े 12 थप्पड़... Hazaribagh Case: हजारीबाग में तीन लोगों की संदिग्ध मौत; जांच के लिए पहुंची राज्य अल्पसंख्यक आयोग की ... Khunti News: खूंटी में रेलवे कंस्ट्रक्शन साइट पर हमला; फायरिंग और आगजनी कर अपराधियों ने फैलाई दहशत Deoghar Crime News: देवघर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई; हथियार के साथ युवक गिरफ्तार, बड़े गैंग का हुआ ...

सैन्य जुंटा की देखरेख में हो रहे चुनाव की हो रही आलोचना

इस दौरान भी हवाई हमलों में 170 की मौत

बैंकॉकः म्यांमार में हाल ही में संपन्न हुए विवादित चुनावों के दौरान हिंसा का एक भयावह चेहरा सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, कई हफ्तों तक चली चुनावी प्रक्रिया के दौरान सैन्य हवाई हमलों में कम से कम 170 नागरिकों की मौत हो गई है।

यह चुनाव न केवल सुरक्षा के लिहाज से विफल रहे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन्हें लोकतांत्रिक मानकों के खिलाफ माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने विश्वसनीय स्रोतों का हवाला देते हुए बताया कि दिसंबर 2025 से लेकर जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह तक, जब मतदान का तीसरा और अंतिम चरण संपन्न हुआ, म्यांमार की सेना ने कुल 408 हवाई हमले किए।

इन हमलों का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में नियंत्रण बनाना था जहाँ विद्रोही समूह और लोकतंत्र समर्थक ताकतें सक्रिय हैं। म्यांमार टीम के प्रमुख जेम्स रोडेहावर ने स्पष्ट किया कि संचार ठप होने और स्थानीय लोगों में व्याप्त डर के कारण वास्तविक मौतों का आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।

सरकारी मीडिया के अनुसार, सैन्य समर्थित यूनियन एंड सॉलिडैरिटी डेवलपमेंट पार्टी ने इन चुनावों में भारी जीत दर्ज की है। हालांकि, इस परिणाम की पहले से ही उम्मीद की जा रही थी क्योंकि यह पूरी प्रक्रिया सेना के कड़े नियंत्रण में थी। 2021 के तख्तापलट से पहले भारी बहुमत से जीतने वाली आंग सान सू ची की पार्टी, नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई। देश के एक बड़े हिस्से में गृहयुद्ध और अशांति के कारण मतदान संभव ही नहीं हो पाया।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने इस पूरी प्रक्रिया को सेना द्वारा आयोजित एक नाटक करार दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष और जातीय समूहों को बाहर रखकर कराए गए ये चुनाव नागरिकों के राजनीतिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आम जनता ने वोट देना है या नहीं इसका फैसला अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि सेना के खौफ के साये में किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य जुंटा ने इन चुनावों का इस्तेमाल अपनी सत्ता को वैधानिक मुखौटा पहनाने के लिए किया है। 2021 में लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से म्यांमार लगातार हिंसा और असुरक्षा के दौर से गुजर रहा है। हवाई हमलों में नागरिकों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि सेना राजनीतिक समाधान के बजाय सैन्य बल के प्रयोग को प्राथमिकता दे रही है।