Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
भरत तिवारी के घर पहुंचे पावर स्टार पवन सिंह: भतीजी ने बांधी राखी, परिजनों ने लगाई निष्पक्ष जांच की ग... झारखंड में नौकरी अभ्यर्थियों के प्रदर्शन पर पुलिस का कड़ा एक्शन: गिरिडीह और हजारीबाग में 3 नई FIR, 9... तनाव के बीच पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर का तेहरान दौरा: क्या 'मक्का डिफेंस पैक्ट' में शामिल होगा ईरान... गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने ली खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जिम्मेदारी: लीक ऑडियो में... EPF में गलत जॉइनिंग या एग्जिट डेट से रुक सकती है पेंशन और ट्रांसफर: जानिए ऑनलाइन ठीक करने का आसान तर... अमरावती जिला महिला अस्पताल के बेबी वार्ड में भीषण आग: वेंटिलेटर ब्लास्ट से 3 नवजातों की दर्दनाक मौत ED का बड़ा एक्शन: मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में 9 ठिकानों पर छापेमारी, ₹19.91 करोड़ का फर्जी... नाइजीरिया में जुमे की नमाज के दौरान जिहादी गुटों की खूनी झड़प कनाडा के एडमंटन शहर के गुरुद्वारा में चाकूबाजी इजरायली हवाई हमलो पर सीरिया ने अब प्रतिक्रिया जतायी

युद्ध क्षेत्र में बच्चों के खिलाफ अत्याचार

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भयावह तस्वीर सामने आयी है

एजेंसियां

संयुक्त राष्ट्रः संयुक्त राष्ट्र की एक बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष दुनिया भर के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में फँसे लगभग 25,000 बच्चे रिकॉर्ड स्तर पर हिंसा और अत्याचार के शिकार हुए हैं। इस रिपोर्ट में बच्चों की हत्या, बलात्कार, अपहरण और उन्हें जबरन युद्ध में झोंकने जैसे संगीन अपराध शामिल हैं। सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार किसी सशस्त्र उग्रवादी समूह के बजाय विभिन्न देशों की सरकारी सेनाएं बच्चों के खिलाफ इन गंभीर अपराधों की मुख्य गुनहगार बनकर उभरी हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा जारी इस वार्षिक रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ अत्याचार करने वालों की एक ब्लैकलिस्ट (काली सूची) तैयार की गई है। इस सूची में दुनिया के 8 देशों की सरकारी सेनाएं और 16 देशों तथा क्षेत्रों के 67 सशस्त्र उग्रवादी समूह शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र के सत्यापित आंकड़ों के अनुसार, बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन (जिसमें स्कूलों और अस्पतालों पर हमले तथा मानवीय सहायता रोकने जैसे कृत्य शामिल हैं) के मामले लगातार चौथे वर्ष बढ़कर 38,558 तक पहुंच गए हैं। इस भयावह स्थिति से कुल 24,174 बच्चे प्रभावित हुए, जिनमें से एक तिहाई लड़कियां थीं। कई हजार बच्चे तो ऐसे थे जिन्हें एक साथ कई तरह के अत्याचारों का सामना करना पड़ा।

सशस्त्र संघर्षों में बच्चों के अधिकारों से जुड़ीं संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि वैनेसा फ्रेजियर ने इस रिपोर्ट का विश्लेषण करते हुए कहा, इन उल्लंघनों का पैमाना और निरंतरता केवल खेद जताने से कहीं अधिक की मांग करती है—इसके लिए कड़े संकल्प की आवश्यकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों से इन निष्कर्षों का सामना करने की अपील की और कहा कि बच्चों की रक्षा करना कोई इच्छा नहीं बल्कि एक कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।

ब्लैकलिस्ट में शामिल देश और संगठन संयुक्त राष्ट्र द्वारा युद्ध क्षेत्रों में बच्चों के खिलाफ दुर्व्यवहार की निगरानी शुरू करने के 30 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब सरकारी ताकतें अधिकांश गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाई गई हैं। वर्ष 2025 की इस सूची में सबसे ऊपर इजरायली सेना और उसके सुरक्षा बल हैं, जो 12,445 उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार हैं। इसके बाद कांगो (4,114 उल्लंघन), म्यांमार, सोमालिया और नाइजीरिया के सशस्त्र समूह हैं, जिनमें से प्रत्येक में 2,000 से अधिक उल्लंघन दर्ज किए गए। सूडान, दक्षिण सूडान, सीरिया की सरकारी सेनाएं और यूक्रेन में सक्रिय रूसी सशस्त्र बल भी इस ब्लैकलिस्ट में शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, इस काली सूची में हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद जैसे चरमपंथी संगठनों को भी जगह दी गई है, जिन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इजरायल पर अचानक हमला किया था। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी बताया कि पिछले साल इजरायली उपद्रवी बसने वालों ने बच्चों के खिलाफ 326 गंभीर उल्लंघन किए। गुटेरेस ने चेतावनी दी कि यदि ये हमले जारी रहे, तो इन इजरायली सेटलर्स को भी इस ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की हत्या (6,266 मामले—जो पिछले साल से 34% अधिक है) और उन्हें घायल करने (7,958 मामले) के मामलों में सरकारी सेनाएं ही मुख्य दोषी थीं। संयुक्त राष्ट्र ने गाजा में इजरायली सेना द्वारा 2,668 फिलिस्तीनी बच्चों और वेस्ट बैंक तथा पूर्वी यरुशलम में 55 बच्चों की हत्या की पुष्टि की है। इसके अलावा गाजा में अन्य 4,588 बच्चों की मौत और 346 इजरायली बच्चों के घायल होने की रिपोर्टों की पुष्टि की प्रक्रिया अभी चल रही है।

महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों और इजरायल में बच्चों के खिलाफ हुए इन अपराधों पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने इजरायल से आग्रह किया है कि वह बच्चों की मौत, अपंगता और स्कूलों-अस्पतालों पर हमलों को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर एक समयबद्ध योजना पर हस्ताक्षर करे। दूसरी ओर, इजरायल के संयुक्त राष्ट्र राजदूत डैनी डैनन ने गुटेरेस की आलोचना करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे एक लोकतांत्रिक देश और हमास जैसे हिंसक आतंकवादी संगठनों के बीच के बुनियादी अंतर को धुंधला करती है। उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र के इतिहास की सबसे बड़ी नैतिक विफलताओं में से एक बताया।

वैनेसा फ्रेजियर ने पत्रकारों को बताया कि युद्ध के बदलते तरीकों (जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में ड्रोन और व्यापक विनाश वाले विस्फोटकों का उपयोग) और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति बढ़ती बेपरवाही के कारण इस साल सरकारी सेनाओं द्वारा किए गए अपराधों में इतनी बड़ी वृद्धि देखी गई है। इसके अलावा, रिपोर्ट में कांगो, नाइजीरिया, हैती, सोमालिया और कोलंबिया में 6,607 बच्चों को जबरन सेना या उग्रवादी समूहों में भर्ती करने, 5,129 बच्चों के अपहरण और 1,783 बच्चों के साथ बलात्कार तथा यौन हिंसा की पुष्टि की गई है।