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असम की मतदाता सूची में साढ़े दस लाख से अधिक नाम कटे

जनसांख्यिकी संकट की दुहाई देने में जुटे हैं असम के सीएम

  • नई सूची को लेकर भी चिंतित है भाजपा

  • 93,021 संदिग्ध मतदाता को अलग किया

  • कार्बी आंगलोंग में अब भी माहौल गर्म

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मसौदा मतदाता सूची के अनुसार, विशेष पुनरीक्षण के बाद राज्य के 10.56 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। वर्तमान में राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 2,51,09,754 है। सूची से नाम हटाए जाने के मुख्य कारणों में मृत्यु (4.78 लाख), पते में परिवर्तन (5.23 लाख) और एक से अधिक बार पंजीकरण (53 हजार) शामिल हैं।

इस सूची में 93,021 संदिग्ध मतदाता को मताधिकार से वंचित रखा गया है, जिनका नागरिकता निर्धारण विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत न्यायाधिकरणों द्वारा किया जा रहा है। मतदाता अब 22 जनवरी तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे, जिसके बाद 10 फरवरी को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।

मुख्यमंत्री की सभ्यतागत लड़ाई की चेतावनी प्रशासनिक बदलावों के बीच, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भाजपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में एक अत्यंत गंभीर बयान दिया। उन्होंने कहा कि असम में जिस गति से मुस्लिम आबादी बढ़ रही है, उससे भविष्य में राज्य को बांग्लादेश में मिलाने की कोशिशें हो सकती हैं। सीएम सरमा के अनुसार, बांग्लादेशी मूल के लोगों की आबादी 40 फीसद से अधिक हो चुकी है और यदि यह 50% का आंकड़ा पार कर गई, तो असम की पहचान और सुरक्षा संकट में पड़ जाएगी।

उन्होंने कांग्रेस पर दशकों तक तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह आगामी चुनाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि स्वदेश और स्वजाति की रक्षा के लिए एक सभ्यतागत लड़ाई है। मुख्यमंत्री ने लव जिहाद और जनसांख्यिकीय बदलावों पर चिंता जताते हुए दावा किया कि स्वदेशी आबादी घटकर 60% रह गई है और 2027 तक प्रवासी मुसलमानों की संख्या 40 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। उन्होंने भाजपा को असमिया पहचान बचाने की अंतिम किरण बताया।

कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में भूमि बेदखली के विरोध में हुई हिंसा के बाद लगातार पांचवें दिन मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहीं। खेरोनी क्षेत्र में हुई झड़पों में अब तक 173 सुरक्षाकर्मी घायल हो चुके हैं। प्रशासन ने गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए यह कड़ा रुख अपनाया है। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन सुरक्षा बलों की भारी तैनाती बनी हुई है।