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रूस का भीषण हमला और बिजली गुल

यूक्रेन के ऊर्जा ढांचों पर हमले का क्रम जारी है

कीवः रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जिसे सैन्य विशेषज्ञ अंतिम प्रहार की रणनीति मान रहे हैं। पिछले 12 घंटों के दौरान, रूसी वायुसेना और नौसेना ने समन्वित तरीके से यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर अब तक का सबसे भीषण और व्यापक हमला बोला है। यूक्रेन की राजधानी कीव सहित खार्किव, ओडेसा और ल्वीव जैसे महत्वपूर्ण शहरों को निशाना बनाया गया। यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने इस हमले में अपनी घातक कलिब क्रूज मिसाइलों और ईरान निर्मित शाहेद ड्रोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है।

इस सैन्य कार्रवाई का समय और लक्ष्य दोनों ही बेहद सोचे-समझे प्रतीत होते हैं। दिसंबर की इस कड़ाके की ठंड में, जब यूक्रेन के अधिकांश हिस्सों में तापमान शून्य से 10 डिग्री नीचे तक गिर चुका है, रूस ने सीधे तौर पर पावर ग्रिड्स, थर्मल पावर प्लांट्स और हीटिंग स्टेशनों को ध्वस्त कर दिया है। इसका तात्कालिक परिणाम यह हुआ है कि लाखों लोग बिना बिजली, पानी और हीटिंग के रहने को मजबूर हैं। कीव की सड़कों पर अंधेरा छाया हुआ है और मेट्रो सेवाएं भी बाधित हुई हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

राजनीतिक पटल पर, यह हमला एक बड़े कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच प्रस्तावित उच्च स्तरीय बैठक से ठीक पहले पुतिन का यह शक्ति प्रदर्शन वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि रूस इस समय अपनी सैन्य बढ़त का उपयोग सौदेबाजी की ताकत के रूप में कर रहा है। वह चाहता है कि भविष्य में होने वाली किसी भी शांति वार्ता से पहले यूक्रेन की आर्थिक और मनोबल की कमर तोड़ दी जाए ताकि उसे उसकी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर किया जा सके।

जेलेंस्की ने इस हमले को ऊर्जा आतंकवाद करार देते हुए पश्चिमी देशों से तत्काल पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और उन्नत हवाई रक्षा कवच की मांग की है। दूसरी ओर, क्रेमलिन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि पश्चिमी देशों ने अपनी भागीदारी बढ़ाई, तो रूस अपने हमलों की तीव्रता और अधिक बढ़ा देगा। इस घटनाक्रम ने पूरे यूरोप में सुरक्षा की चिंताएं बढ़ा दी हैं।