Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Lucknow Fire Tragedy: अलीगंज की बिल्डिंग में भीषण आग; एसी डक्ट से फैली लपटों ने ली 15 जिंदगियां Ujjain Gaya Kotha Tirth: उज्जैन के गयाकोठा तीर्थ का बदलेगा स्वरूप; विकास कार्यों के लिए मिले 6.7 करो... Madhya Pradesh News: ट्रांसफर नियमों का उल्लंघन? एमएसएमई और पीडब्ल्यूडी में वरिष्ठता को लेकर बढ़ा विव... Gwalior JAH Hospital News: जया आरोग्य अस्पताल में पार्किंग के नाम पर खुली लूट; खुद अस्पताल के डॉक्टर... Gwalior Coaching Fire Safety: ग्वालियर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा राम भरोसे; केवल 3 के पास फायर... MP UCC Draft: मध्य प्रदेश में 10 दिन में तैयार होगा समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट; जानें आदिवासियों ... Gwalior News: डीएलएड परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी का खुलासा; चाचा दे रहा था भतीजे की जगह परीक्षा, प... Terror Module Exposed: भोपाल एटीएस की बड़ी कार्रवाई; 'लोन वुल्फ' मॉड्यूल तैयार करने वाले सरगना की रिम... Mephedrone Drugs Network: भोपाल में ड्रग्स बनाने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़; हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ... Seoni Jumbo Sitaphal GI Tag: सिवनी के सीताफल को मिला GI टैग; अब दुनिया भर में बिखेरेगा अपने स्वाद का...

केसरिया तेरा इश्क़ है पिया .. .. .. ..

विश्व हिंदू परिषद ने हाल ही में एक घोषणा की है जिसने वैचारिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। परिषद का कहना है कि यदि आप एक सच्चे हिंदू हैं, तो आपको इस बार क्रिसमस का पूर्णतः बहिष्कार करना चाहिए। उनका तर्क है कि चूंकि यह एक ईसाई त्योहार है, इसलिए हिंदुओं को इसमें सम्मिलित नहीं होना चाहिए।

हाल ही में कोलकाता आए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू समाज की उदारता और सेवा भाव पर जोर दिया था, लेकिन उन्हीं के वैचारिक संगठन के एक वरिष्ठ नेता और इंद्रप्रस्थ प्रदेश मंत्री, सुरेंद्र गुप्त का स्वर कुछ अलग है। गुप्त का मानना है कि हिंदुओं को आत्म-संयम और आत्म-सम्मान की आवश्यकता है।

उनका दावा है कि मिशनरियों द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण किया जा रहा है और क्रिसमस के उत्सव में भाग लेना उनके धार्मिक एजेंडे को मौन स्वीकृति देने जैसा है। उनके अनुसार, यह धार्मिक स्वतंत्रता का नहीं बल्कि शोषण और धर्मांतरण के विरुद्ध प्रतिरोध का विषय है।

दूसरी तरफ खुद प्रधानमंत्री चर्च जाकर क्रिसमस के पर्व में शामिल हो रहे हैं। यह कैसा दोहरा व्यवहार है। बुनियादी प्रश्न उठता है—क्या यह वही नया भारत है जिसकी हम कल्पना कर रहे हैं? क्या प्रभु यीशु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना या बड़ा दिन (क्रिसमस) मनाना हिंदू विरोधी कृत्य माना जाएगा?

धार्मिक सिद्धांतों से इतर यदि हम महापुरुषों के जीवन को देखें, तो स्वामी विवेकानंद के पास हमेशा दो पुस्तकें रहती थीं—गीता और बाइबल। वे थॉमस केम्पिस की पुस्तक इमिटेशन ऑफ क्राइस्ट से भी गहरे प्रभावित थे। यीशु मसीह के प्रति स्वामीजी की अगाध श्रद्धा थी। धर्मांतरण और उत्सव दो अलग विषय हैं। बलपूर्वक धर्मांतरण किसी भी धर्म में स्वीकार्य नहीं है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किसी महापुरुष के जन्मदिन का उत्सव न मनाया जाए।

इसी बात पर फिल्म ब्रह्मास्त्र का यह गीत याद आ रहा है। इसे अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखा है और अरिजीत सिंह की आवाज़ में यह बेहद सुकून देने वाला गीत है। गीत के बोल इस तरह हैं

मुझको इतना बता दे कोई

कैसे तुझसे दिल न लगाए कोई

रब्बा ने तुझको बनाने में

कर दी है हुस्न की खाली तिजोरियाँ

काजल की सियाही से लिखी है तूने

जाने कितनों की लव स्टोरियाँ

केसरिया तेरा इश्क़ है पिया

रंग जाऊँ जो मैं हाथ लगाऊँ

दिन बीते सारा तेरी फिक्र में

रैन सारी तेरी खैर मनाऊँ

केसरिया तेरा इश्क़ है पिया

रंग जाऊँ जो मैं हाथ लगाऊँ

दिन बीते सारा तेरी फिक्र में

रैन सारी तेरी खैर मनाऊँ

पतझड़ के मौसम में भी

रंगी चिनारों जैसी

झंके सन्नाटों में तू

वीणा के तारों जैसी

सदियों से भी लंबी ये

मन की अमावस है

और तू सुहागन चाँदनी जैसी

केसरिया तेरा इश्क़ है पिया

रंग जाऊँ जो मैं हाथ लगाऊँ

दिन बीते सारा तेरी फिक्र में

रैन सारी तेरी खैर मनाऊँ

तेरी नज़रों का धुआँ

मेरे आगे पीछे घूमे

जैसे बनारस की गली

जैसे गंगा का किनारा

मेरी साँसों की लहर

तेरे कानों को जो चूमे

जैसे काशी की सुबह

जैसे सातों सुर का तारा

काजल की सियाही से लिखी है तूने

जाने कितनों की लव स्टोरियाँ

केसरिया तेरा इश्क़ है पिया

रंग जाऊँ जो मैं हाथ लगाऊँ

दिन बीते सारा तेरी फिक्र में

रैन सारी तेरी खैर मनाऊँ

स्वामी विवेकानंद ने 1893 के अपने प्रसिद्ध शिकागो व्याख्यान में स्पष्ट कहा था क्या मैं चाहता हूँ कि ईसाई हिंदू बन जाएं? ईश्वर ऐसा न करे। रामकृष्ण मिशन की स्थापना और उसके संचालन में भी ईसा मसीह के त्याग और सेवा के आदर्शों का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। भगिनी निवेदिता, क्रिस्टीन और जे.जे. गुडविन जैसे ईसाई शिष्यों का स्वामीजी के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान था।

रामकृष्ण मिशन के शिक्षण संस्थानों और बेलूर मठ की शाखाओं में आज भी क्रिसमस मनाया जाता है और प्रभु ईसा को केक का भोग लगाया जाता है। चो क्या अब रामकृष्ण मिशन भी गैर हिंदू है। दूसरी तरफ मोदी जी के चेले देश के अलग अलग हिस्सों में क्रिसमस समारोह का विरोध करते और जय श्री राम का नारा लगाते घूम रहे हैं।

अब इनसे कौन पूछे कि भाई हिंदू धर्म और हमारे महापुरुषों के बारे में आप कितना जानते है। ज्यादा सवाल करेंगे तो तुरंत यही उत्तर मिलेगा यह सभी धर्म विरोधी हैं मानों पूरे धर्म का ठेका अब इन्हीं लोगों के हाथों में आ गया है। गनीमत है कि बहुत बड़े हिंदू धार्मिक संगठन क्रिसमस मनाते हैं और उन्हें अब तक गैर हिंदू कहने का साहस ऐसे क्रिसमस विरोधियों को नहीं हुआ है। पता नहीं बेहतर समाज सेवा के बदले सिर्फ घृणा और हिंसा का प्रचार करने वालों को इससे क्या मिलता है।