पिछले बारह घंटे में लेबनान की बेक्का घाटी में तबाही
बेरूतः मध्य पूर्व का आकाश एक बार फिर बारूद के धुएं और चीख-पुकार से भर गया है। पिछले 12 घंटों के भीतर, इजरायली रक्षा बलों ने दक्षिण लेबनान और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बेक्का घाटी के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर अब तक के सबसे व्यापक और विनाशकारी हवाई हमले किए हैं।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों ने एक भीषण त्रासदी का रूप ले लिया है, जिसमें कम से कम 31 निर्दोष नागरिकों की दुखद मृत्यु हो गई है। मरने वालों में एक बड़ी संख्या उन मासूम बच्चों और महिलाओं की है, जो अपने घरों में सुरक्षित होने की उम्मीद कर रहे थे। इसके अतिरिक्त, हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से कई की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय अस्पताल संसाधनों की कमी के बावजूद घायलों के उपचार में जी-जान से जुटे हैं।
इजरायली सैन्य कमान ने अपने आधिकारिक बयान में इन हमलों को लक्षित कार्रवाई करार दिया है। उनका दावा है कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर हिजबुल्लाह के उन गुप्त ठिकानों और हथियार डिपो को नष्ट किया गया है, जहाँ से इजरायल की उत्तरी सीमावर्ती बस्तियों पर निरंतर रॉकेट दागे जा रहे थे।
हालांकि, युद्धभूमि से आ रही जमीनी रिपोर्टें एक अलग ही भयावह कहानी बयां कर रही हैं। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों, पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बमबारी के दौरान सटीकता के दावों के विपरीत कई बहुमंजिला आवासीय इमारतें ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गईं।
इसके परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में नागरिक मलबे के नीचे दब गए हैं। वर्तमान में, लेबनानी नागरिक सुरक्षा दल और स्वयंसेवक नंगे हाथों और सीमित मशीनों की मदद से कंक्रीट के ढेरों को हटाने और मलबे में दबे संभावित जीवित बचे लोगों को तलाशने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
राजनीतिक स्तर पर, लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने इस घटना पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों और जिनेवा कन्वेंशन का घोर उल्लंघन बताते हुए वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे इजरायल की इस निरंकुश आक्रामकता को रोकें। लेबनान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तुरंत एक आपातकालीन सत्र बुलाने और प्रभावी हस्तक्षेप करने की औपचारिक मांग की है।
दूसरी ओर, इस ताजा हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों की रातों की नींद उड़ा दी है। वैश्विक स्तर पर यह गंभीर चिंता जताई जा रही है कि यदि यह सिलसिला नहीं थमा, तो यह छिटपुट संघर्ष एक पूर्ण विकसित क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है, जिसमें पड़ोसी देश भी शामिल हो सकते हैं।
सीमावर्ती गांवों से हजारों की संख्या में लोग अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी और घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। सड़कों पर शरणार्थियों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, जिससे एक अभूतपूर्व मानवीय संकट पैदा हो गया है। अस्थायी शिविरों में भोजन, जीवन रक्षक दवाओं और स्वच्छ पेयजल की भारी किल्लत महसूस की जा रही है, जो आने वाले समय में एक बड़ी महामारी या भुखमरी का संकेत दे रही है।