प्रदेश भाजपा कोषाध्यक्ष के खिलाफ ही मामला दर्ज
राष्ट्रीय खबर
पटनाः बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी और अवैध निकासी के गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है, बल्कि इसमें एक मृत व्यक्ति के जाली हस्ताक्षरों के उपयोग जैसा संगीन आरोप भी शामिल है।
मामले का मुख्य विवरण और आरोप शिकायत के अनुसार, यह पूरा विवाद एचडीएफसी बैंक में संचालित बीसीए के बैंक खाते से जुड़ा है। नियमों के मुताबिक, एसोसिएशन के खाते का संचालन सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षरों से होना चाहिए। आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी ने नियमों की अनदेखी करते हुए तत्कालीन कोषाध्यक्ष आशुतोष नंदन सिंह के साथ मिलकर खाते का संचालन किया।
मामला तब और गंभीर हो गया जब कोषाध्यक्ष के निधन के बावजूद खाते से लेनदेन जारी रहा। आरोप है कि राकेश कुमार तिवारी ने बैंक मैनेजर और अकाउंट विभाग की मिलीभगत से मृतक कोषाध्यक्ष के जाली हस्ताक्षर चेक और आरटीजीएस फॉर्म पर किए और लगभग 30 लाख रुपये की राशि विभिन्न खातों में अवैध रूप से ट्रांसफर कर दी।
कानूनी कार्यवाही और न्यायलय का हस्तक्षेप इस कथित घोटाले का खुलासा बिहार शिवसेना के तत्कालीन अध्यक्ष आशुतोष झा द्वारा दायर याचिका के बाद हुआ। शुरुआत में जब परिवादी ने श्रीकृष्णा पुरी थाने में मामला दर्ज कराने का प्रयास किया, तो स्थानीय पुलिस ने राजनीतिक दबाव या अन्य कारणों से एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला न्यायालय पहुँचा। पटना सिविल कोर्ट की कड़ी फटकार और स्पष्ट आदेश के बाद, पाटलिपुत्रा थाने में राकेश कुमार तिवारी के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्राथमिकी में शामिल गंभीर धाराएँ पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे 318/4 (धोखाधड़ी), 316/2 (अमानत में खयानत), 315, 336/3, 335, 338 और 334 के तहत केस दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस बैंक रिकॉर्ड्स और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि जाली हस्ताक्षरों की पुष्टि की जा सके। यह मामला बिहार की खेल राजनीति में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है, जिसकी अब व्यापक आपराधिक जांच शुरू हो गई है।