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भाजपा नेता के परिवार के छह लोग चुनाव में पराजित

लोहा नगर परिषद चुनाव में मतदाताओं ने नकारा

राष्ट्रीय खबर

मुंबई: महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में परिवारवाद को लेकर छिड़ी बहस के बीच नांदेड़ जिले के लोहा कस्बे से भाजपा के लिए एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है। हाल ही में संपन्न हुए नगर परिषद चुनावों के नतीजों ने न केवल स्थानीय स्तर पर भाजपा की रणनीति को विफल कर दिया, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।

इस चुनाव में भाजपा के एक कद्दावर नेता और उनके परिवार के 6 सदस्यों को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है। इस बड़ी हार के बाद कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि मतदाताओं ने भाजपा की दोहरी राजनीति और भाई-भतीजावाद को करारा सबक सिखाया है।

चुनावी समीकरणों पर नजर डालें तो भाजपा ने लोहा के मेयर (नगर अध्यक्ष) पद के लिए गजानन सूर्यवंशी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। पार्टी की रणनीति यहीं तक सीमित नहीं रही; सूर्यवंशी परिवार के 5 अन्य सदस्यों को भी अलग-अलग वार्डों से चुनावी मैदान में उतारा गया था।

इनमें गजानन की पत्नी गोदावरी, उनके भाई सचिन सूर्यवंशी, भाभी सुप्रिया सूर्यवंशी, साले युवराज वाघमारे और उनके भतीजे की पत्नी रीना व्यवहारे शामिल थे। भाजपा को उम्मीद थी कि एक ही प्रभावशाली परिवार को प्रतिनिधित्व देकर वह सत्ता की राह आसान कर लेगी, लेकिन परिणाम इसके बिल्कुल विपरीत रहे और परिवार के सभी 6 प्रत्याशियों को हार का स्वाद चखना पड़ा।

इस करारी हार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के लिए भी एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। चव्हाण, जो हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं, उन्होंने ही लोहा के इस चुनाव प्रचार की पूरी कमान संभाली थी। कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल तिवारी ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा हमेशा कांग्रेस पर वंशवाद की राजनीति का आरोप लगाती रही है, लेकिन नांदेड़ में उसने खुद मर्यादाएं लांघते हुए बेशर्मी से परिवारवाद का कार्ड खेला। उन्होंने आगे कहा कि लोहा की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि वे थोपे गए रिश्तेदारों के बजाय काम करने वाले प्रतिनिधियों को तरजीह देंगे।

राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक प्रताप पाटिल चिखलीकर का मजबूत गढ़ माना जाता है। इस बार यहाँ मुकाबला त्रिकोणीय था, जिसमें भाजपा, कांग्रेस और एनसीपी के बीच कड़ी टक्कर थी। अंततः, लोहा नगर परिषद की सत्ता पर अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के उम्मीदवार शरद पवार ने जीत दर्ज कर कब्जा जमाया। जानकारों का मानना है कि भाजपा ने महा विकास अघाड़ी की आलोचनाओं के बावजूद अपने उम्मीदवारों को वापस नहीं लिया, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा।