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चंद्रनाथ के हत्यारों की तलाश में यूपी तक जांच

बंगाल के चर्चित हत्याकांड में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं

  • बंगाल सीआईडी कर रही है जांच

  • यूपी के गुनौर शहर का संदेह

  • दो युवकों से पूछताछ भी हुई

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: बंगाल सीआईडी  की एक टीम, तत्कालीन मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ के हत्यारों के सुराग का पीछा करते हुए उत्तर प्रदेश पहुंची। हालांकि, सूत्रों के अनुसार शनिवार को टीम को कोई गिरफ्तारी करने में सफलता नहीं मिली।

चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह अपनी महिंद्रा स्कॉर्पियो कार से मध्यमग्राम स्थित अपने अपार्टमेंट लौट रहे थे। जांचकर्ताओं को शुरुआत में संदेह था कि हमलावर हत्या को अंजाम देने के बाद उत्तर प्रदेश के संभल जिले के गुन्नौर शहर भाग गए हैं।

लखनऊ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, टीम ने गुन्नौर से दो युवकों को हिरासत में लिया और उनसे कई घंटों तक पूछताछ की। लेकिन कोई निर्णायक परिणाम सामने नहीं आया। अधिकारी ने कहा कि टीम उन सूचनाओं पर काम कर रही थी जिनमें संकेत दिया गया था कि हत्यारे गुन्नौर में छिपे हैं। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए गुन्नौर का लोकेशन मिलने के बाद, टीम पहले बदायूं जिले पहुंची और वहां के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से सहायता मांगी, जिसके बाद वे संभल की ओर बढ़े।

गौरतलब है कि गुन्नौर पहले बदायूं जिले का हिस्सा था, लेकिन 2011 में इसे नवगठित संभल जिले में शामिल कर लिया गया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब शनिवार को ही शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल की पहली भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।

बदायूं की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने बताया, बंगाल पुलिस के अधिकारी किसी की तलाश में गुन्नौर जाते समय बदायूं पहुंचे थे। लेकिन उन्हें वहां कुछ नहीं मिला और वे वापस लौट गए। दूसरी ओर, संभल के पुलिस अधीक्षक के.के. विश्नोई ने जिले में बंगाल पुलिस के किसी भी तलाशी अभियान से इनकार किया और इस जानकारी को आधारहीन करार दिया।

शनिवार देर रात सूत्रों ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में कुछ व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता अपराध स्थल के पास के मोबाइल टावरों से एकत्र किए गए कॉल डंप डेटा से प्राप्त तकनीकी इनपुट्स पर काम कर रहे हैं। कॉल डंप वह तकनीकी डेटा होता है जिसके जरिए एक निश्चित समय के दौरान किसी विशेष टावर से होने वाले मोबाइल कॉल ट्रैफिक को ट्रैक किया जाता है, ताकि संदिग्धों की आवाजाही और संपर्कों का पता लगाया जा सके।