अंतरिक्ष में एलन मस्क की स्टारलिंक पर खतरा मंडराया
वॉशिंगटन: एलन मस्क के स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क को लेकर वैश्विक अंतरिक्ष सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई और चिंताजनक चेतावनी सामने आई है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों, विशेषकर नाटो और अमेरिका की जांच रिपोर्टों के अनुसार, रूस एक ऐसा खतरनाक एंटी-सैटेलाइट हथियार विकसित कर रहा है जो एक साथ हजारों सैटेलाइट्स को निष्क्रिय कर सकता है। इसे विशेषज्ञ जोन-इफेक्ट हथियार कह रहे हैं, जो अंतरिक्ष युद्ध की परिभाषा को बदल सकता है।
दिसंबर 2025 की ताजा खुफिया जानकारियों के अनुसार, रूस एक ऐसे हथियार का परीक्षण कर रहा है जो अंतरिक्ष में शार्पनेल या छर्रों के विशाल बादल पैदा कर सकता है। यह तकनीक किसी एक सैटेलाइट को सीधे हिट करने के बजाय, स्टारलिंक की कक्षा में लाखों छोटे-छोटे उच्च-घनत्व वाले धातु के कण फैला देगी। जब स्टारलिंक के सैटेलाइट्स इन कणों के संपर्क में आएंगे, तो वे टकराकर नष्ट हो जाएंगे।
इस हथियार का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में पश्चिमी देशों की अंतरिक्ष श्रेष्ठता को खत्म करना है, क्योंकि स्टारलिंक यूक्रेन के लिए संचार की रीढ़ बना हुआ है। इस खतरे का असर केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है। स्टारलिंक वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े सैटेलाइट इंटरनेट प्रदाताओं में से एक है। यदि रूस इन सैटेलाइट्स को निशाना बनाता है, तो वैश्विक नागरिक इंटरनेट सेवाएं, विमानन सुरक्षा, समुद्री नेविगेशन और बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह ठप हो सकते हैं। विशेषज्ञों को डर है कि एक बार अंतरिक्ष में कचरा पैदा होने के बाद, वह एक चेन रिएक्शन शुरू कर सकता है, जिससे अन्य देशों और वाणिज्यिक कंपनियों के सैटेलाइट्स भी नष्ट हो जाएंगे। इससे निचली पृथ्वी कक्षा दशकों तक उपयोग के लायक नहीं रहेगी।
रूसी अधिकारियों ने बार-बार चेतावनी दी है कि यूक्रेन की सेना की मदद करने वाले वाणिज्यिक सैटेलाइट्स उनके लिए जायज सैन्य लक्ष्य हो सकते हैं। हाल ही में रूस ने अपनी एस-500 प्रणाली का भी जिक्र किया है जो लो-अर्थ ऑर्बिट में लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। वहीं, अमेरिका और नाटो ने इसे 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी का उल्लंघन बताते हुए इसे अंतरिक्ष का शस्त्रीकरण करार दिया है।
स्टारलिंक के खिलाफ रूस की यह आक्रामक तैयारी अंतरिक्ष को एक नए युद्धक्षेत्र में बदल रही है। यह न केवल एलन मस्क की कंपनी के लिए चुनौती है, बल्कि आधुनिक सभ्यता के लिए भी बड़ा खतरा है जो पूरी तरह उपग्रह-आधारित तकनीक पर निर्भर है। यदि अंतरिक्ष में मलबे का बादल पैदा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना भी कठिन होगा, क्योंकि ये छोटे कण किसी भी रडार की पकड़ में नहीं आएंगे।