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यूक्रेन के ओडेसा पर भीषण रूसी हवाई हमला

अपने बंदरगाह पर हमले होने के बाद जवाबी कार्रवाई की

ओडेसाः रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष अब एक ऐसे भयावह मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ रिहायशी इलाकों और आर्थिक केंद्रों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। पिछले 12 घंटों के दौरान, रूसी वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से यूक्रेन के दक्षिण-पश्चिमी रणनीतिक बंदरगाह शहर, ओडेसा, पर मिसाइलों और कामिकेज़ ड्रोन्स की झड़ी लगा दी है।

यूक्रेनी सैन्य प्रशासन के आधिकारिक बयानों के अनुसार, इस हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि शहर की सुरक्षा घेरे को भेदते हुए कई मिसाइलें रिहायशी बस्तियों में जा गिरीं। इस हमले में अब तक 8 मासूम नागरिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत पूरी तरह जमींदोज हो गई है, जिसके मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है।

यह हमला रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ओडेसा केवल एक शहर नहीं, बल्कि यूक्रेन के अनाज निर्यात का सबसे बड़ा द्वार है। रूसी हमलों ने बंदरगाह के उन गोदामों और लोडिंग टर्मिनलों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है जो वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा हैं।

हमले के तुरंत बाद ओडेसा और उसके आसपास के जिलों में बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। कड़कड़ाती ठंड के बीच बिजली गुल होने से लाखों लोगों के सामने जीवन का संकट खड़ा हो गया है। आपातकालीन सेवाओं के कर्मी और दमकल विभाग की टीमें शून्य से नीचे के तापमान में मलबे को हटाने और जीवित बचे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस हमले के तुरंत बाद एक वीडियो संदेश जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से और अधिक उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों (जैसे पैट्रियट और आईआरआईएस-टी) की तत्काल आपूर्ति की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना पर्याप्त सुरक्षा कवच के, यूक्रेन अपने निर्दोष नागरिकों को इन हवाई हमलों से बचाने में असमर्थ है।

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने इस कृत्य की तीखी आलोचना की है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि जानबूझकर नागरिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाना जिनेवा कन्वेंशन के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।

दूसरी ओर, मास्को के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में हमलों का बचाव करते हुए कहा है कि उनके निशाने पर केवल वैध सैन्य लक्ष्य थे। रूस का दावा है कि ओडेसा के बंदरगाह क्षेत्र में पश्चिमी देशों द्वारा भेजे गए लंबी दूरी के हथियारों और गोला-बारूद का गुप्त भंडारण किया गया था।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि रूस की वास्तविक रणनीति यूक्रेन को आर्थिक रूप से पंगु बनाना है। अनाज निर्यात को रोककर और ऊर्जा संकट पैदा करके रूस, यूक्रेन को बातचीत की मेज पर झुकने के लिए मजबूर करना चाहता है। यह स्थिति न केवल यूक्रेन के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है।