युद्ध की समाप्ति और सीधी वार्ता पर रूसी राष्ट्रपति का बयान
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उस पत्र की भाषा भी अभद्र ही थी
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रूस की सारी शर्तें अभी पूरी नहीं
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नाटो भी समझौता याद रखा करे
एजेंसियां
मॉस्कोः रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ आमने-सामने की वार्ता के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ज़ेलेंस्की ने गुरुवार को एक खुला पत्र लिखकर पुतिन से सीधी बातचीत की अपील की थी ताकि जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए कोई ठोस समाधान निकाला जा सके। इस पत्र में ज़ेलेंस्की ने युद्धविराम का आग्रह किया था, साथ ही पुतिन की उम्र और हाल ही में यूक्रेन द्वारा रूसी क्षेत्र, विशेषकर सेंट पीटर्सबर्ग पर किए गए हमलों को लेकर कटाक्ष भी किए थे।
सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित वार्षिक आर्थिक मंच के दौरान पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा, मुझे फिलहाल ऐसी किसी बैठक का कोई औचित्य नजर नहीं आता। पुतिन ने ज़ेलेंस्की के पत्र को अभद्र करार दिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति का यह कदम वास्तव में बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि बैठक की संभावनाओं को खत्म करने के लिए उठाया गया था। पुतिन का मानना है कि कोई भी युद्धविराम केवल यूक्रेन को अपनी सेना को फिर से संगठित करने का समय देगा, जबकि रूस की शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं।
पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस केवल दीर्घकालिक समझौतों में रुचि रखता है, न कि कुछ महीनों के अल्पकालिक विराम में। उन्होंने कहा, विशेषज्ञों को पहले समाधान खोजने दें, उसके बाद ही हम मुलाकात पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक रूस अपने निर्धारित लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेता। मास्को की प्रमुख शर्तों में यूक्रेन का डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों से पीछे हटना और नाटो में शामिल होने की अपनी महत्वाकांक्षा को छोड़ना शामिल है।
दूसरी ओर, ज़ेलेंस्की ने पुतिन के जवाब पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। टेलीग्राम पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, पुतिन ने एक बार फिर युद्ध को चुना है। वे बस युद्ध समाप्त नहीं करना चाहते। कीव का तर्क है कि वे अपना एक इंच भी क्षेत्र नहीं छोड़ेंगे, क्योंकि किसी भी रियायत से रूस का मनोबल बढ़ेगा और भविष्य में वह फिर से आक्रमण कर सकता है। व्हाइट हाउस ने पहले इस पत्र को शांति की एक उम्मीद के रूप में देखा था और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि दोनों नेताओं की बैठक बहुत अच्छी होगी, लेकिन पुतिन के इस रुख ने शांति वार्ता की तमाम उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है।