Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Patiala Road Accident: पटियाला-फतेहगढ़ साहिब बाईपास पर दर्दनाक हादसा; रेत से भरे टिप्पर ने बाइक सवार... Punjab Summer Vacation News: भीषण गर्मी और मानसून में देरी के बीच स्कूलों को खोलने पर संशय; अभिभावको... Harjinder Singh Dhami News: शिरोमणि कमेटी प्रधान ने इस्तीफे और हुक्मनामों पर दी सफाई; अकाल तख्त साहि... Malout Crime News: नशीले कैप्सूल बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़; 7 गिरफ्तार, 2000 प्रेगाभा कैप्सूल बराम... Amritsar Crime News: सीमा पार से संचालित अवैध हथियार तस्करी का भंडाफोड़; 4 तस्कर गिरफ्तार, 10 पिस्तौ... Ludhiana News: घर में जादू-टोना करता व्यक्ति CCTV में कैद; सलेम टाबरी इलाके में मचा हड़कंप Haryana Congress Politics: बृजेंद्र सिंह की बैठक में हुड्डा के करीबी एम.एस. चोपड़ा की मौजूदगी; हरिया... Haryana Congress Politics: बृजेंद्र सिंह की बैठक में हुड्डा के करीबी एम.एस. चोपड़ा की मौजूदगी; हरिया... Haryana Government Tenders: 5 करोड़ से अधिक के टेंडरों की जानकारी अब ऑनलाइन; पारदर्शिता के लिए सरकार... Haryana Air Pollution: हरियाणा में 1 अक्टूबर से लागू होगी 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' नीति; बिना पॉल्यूश...

सुप्रीम कोर्ट ने 10 डेंटल कॉलेजों पर लगाया जुर्माना

एनईईटी फेल कर गये छात्रों को भी मिल गया दाखिला

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने मेडिकल और डेंटल शिक्षा की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी शिक्षण संस्थानों को एक कड़ा और ऐतिहासिक संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के 10 निजी डेंटल कॉलेजों पर नियमों का घोर उल्लंघन करने के आरोप में कुल ₹100 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया है। इन कॉलेजों ने शैक्षणिक सत्र 2016-17 के दौरान उन छात्रों को बीडीएस  पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया था, जो राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) में न्यूनतम योग्यता अंक (क्वालीफाइंग मार्क्स) प्राप्त करने में विफल रहे थे। अदालत ने प्रत्येक कॉलेज को ₹10-10 करोड़ की राशि जुर्माने के तौर पर जमा करने का आदेश दिया है।

गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं जस्टिस की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शिक्षा, विशेष रूप से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता राष्ट्र के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा, जब छात्र नीट जैसी अनिवार्य परीक्षा में ही विफल हो गए थे, तो किस आधार पर उन्हें डॉक्टर बनाने के लिए प्रवेश दिया गया? अदालत ने इसे शिक्षा प्रणाली को दूषित करने का प्रयास माना और स्पष्ट किया कि व्यावसायिक लाभ के लिए नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

2007 के नियमों की अनदेखी पूरा विवाद 2016-17 के सत्र से जुड़ा है। उस समय सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार देशभर में मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ‘नीट‘ को एकमात्र आधार बनाया गया था। इसके बावजूद, राजस्थान के इन 10 निजी कॉलेजों ने वर्ष 2007 के पुराने और अप्रासंगिक नियमों का हवाला देते हुए अयोग्य छात्रों को पिछले दरवाजे से दाखिला दे दिया। यह मामला कई वर्षों तक कानूनी दांव-पेंच में फंसा रहा, जिससे न केवल शैक्षणिक मानकों पर सवाल उठे, बल्कि उन छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक गया जिन्होंने गलत तरीके से प्रवेश लिया था।

शिक्षा सुधार में खर्च होगी राशि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जुर्माने से प्राप्त होने वाली 100 करोड़ की इस विशाल राशि का उपयोग चिकित्सा शिक्षा के ढांचे में सुधार, गरीब मेधावी छात्रों की सहायता या अन्य निर्धारित शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन निजी संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगेगी जो मोटी फीस के लालच में योग्यता की अनदेखी करते हैं। यह निर्णय भविष्य की दाखिला प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमों को सख्ती से लागू करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।