चुनाव आयोग के इंकार का मसला शीर्ष अदालत में पहुंचा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकारों से उस याचिका पर जवाब तलब किया है, जिसमें आधार कार्ड के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता, निवास स्थान और पते के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है, जबकि यह केवल पहचान के सत्यापन के लिए बनाया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका पर नोटिस जारी किया है और इसे इसी तरह के लंबित मामलों के साथ टैग कर दिया है।
याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा जारी आधार कार्ड केवल एक पहचान दस्तावेज है, न कि नागरिकता, निवास या जन्मतिथि का प्रमाण। याचिका के माध्यम से अदालत से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं कि आधार के उपयोग को सख्ती से केवल पहचान की पुष्टि तक ही सीमित रखा जाए। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि नए मतदाता पंजीकरण के आवेदन फॉर्म में आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में मांगना आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9, ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950’ की धारा 23(4) और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
याचिका में आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, जो कहता है कि आधार नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं है। इसके अलावा, 22 अगस्त 2023 को प्राधिकरण द्वारा जारी एक अधिसूचना का भी हवाला दिया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आधार केवल पहचान का सबूत है, नागरिकता, पते या जन्मतिथि का नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख आधार की वैधानिक परिभाषा और उसके उपयोग के दायरे को स्पष्ट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यह मामला प्रशासनिक स्तर पर आधार कार्ड के व्यापक और अनियंत्रित उपयोग को रोकने की मांग करता है, ताकि पहचान और नागरिकता के बीच संवैधानिक अंतर को बनाए रखा जा सके।