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मीनाक्षी नटराजन की याचिका शीर्ष अदालत ने खारिज कर दी

कहां चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दें

  • अवकाशकालीन पीठ में हुई इसकी सुनवाई

  • याचिका के गुण-दोष पर कोई विचार नहीं

  • राहुल गांधी ने इसे सीट चोरी करार दिया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस सदस्य मीनाक्षी नटराजन द्वारा दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए उनके नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका दायर कर अपनी चुनौती पेश करने की स्वतंत्रता दी।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत संवैधानिक बाधा का हवाला देते हुए रिट क्षेत्राधिकार का उपयोग करने से इनकार कर दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि नामांकन रद्द करने में स्पष्ट और प्रत्यक्ष त्रुटियों को दूर करने के लिए अनुच्छेद 32 का सहारा लिया जा सकता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि नामांकन 9 जून को रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा द्वारा इसलिए रद्द किया गया क्योंकि उन्होंने फॉर्म 26 में तेलंगाना की एक अदालत में अपने खिलाफ दायर एक निजी शिकायत का खुलासा नहीं किया था। सिंघवी ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33A और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के अनुसार, केवल उन आपराधिक मामलों का खुलासा करना आवश्यक है जहां आरोप तय हो चुके हों। उन्होंने इसे बेतुका और मनमाना निर्णय बताते हुए कहा कि यह सरासर अन्याय है। उन्होंने तर्क दिया कि न्यायालय को चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि चुनाव हो सके, क्योंकि नामांकन रद्द होने के कारण अन्य उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया है।

दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक वैधानिक अधिकार है। उन्होंने अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप वर्जित है और इसके लिए रिट याचिका के बजाय चुनाव याचिका ही एकमात्र कानूनी उपाय है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस पर जोर दिया। पीठ ने अंततः याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को चुनाव न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी।

इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूरी प्रक्रिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा पहले इस देश में मोदी के शासन में वोट चोरी हो रही थी। उसके बाद एसआईआर के बहाने वोटरों की चोरी होने लगी। अब यह दोनों हथकंडे काम न हीं आये तो सीधे सीटों की चोरी हो रही है। चुनाव आयोग की आंखों के सामने यह सब कुछ गलत हो रहा है और आयोग पूरी तरह भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है।