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सरकार ने अपनी घोषणा से निजी कर्मचारियों को निराश किया

निजी पेंशन बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (ईपीएस-95) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाने की उम्मीदों को संसद में केंद्र सरकार के जवाब से करारा झटका लगा है। श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।

यह जवाब उन अटकलों पर विराम लगाता है जिनमें दावा किया जा रहा था कि अक्टूबर 2025 में होने वाली सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में पेंशन में बड़ी वृद्धि पर मुहर लग सकती है। मंत्री ने फंड की वित्तीय स्थिति और स्कीम की संरचना का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि पेंशनरों को महंगाई भत्ता नहीं दिया जा सकता।

1 दिसंबर 2025 को लोकसभा में सांसद बलया मामा सुरेश गोपीनाथ म्हात्रे ने पेंशनभोगियों की ओर से कई तीखे सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार 1,000 की न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,500 करने पर विचार कर रही है, पेंशन क्यों नहीं बढ़ रही है, महंगाई भत्ता क्यों नहीं दिया जाता, और क्या सरकार ने कभी यह जानने का प्रयास किया है कि आज के दौर में 1,000 रुपये में गुजारा कैसे संभव है।

मंत्री ने जवाब में बताया कि ईपीएस-95 एक डिफाइंड कंट्रीब्यूशन स्कीम है, न कि सरकारी नौकरियों की तरह सैलरी-लिंक्ड स्कीम। इसका अर्थ है कि पेंशन की राशि इस पर निर्भर करती है कि फंड में कितना पैसा जमा हुआ है, न कि महंगाई दर पर। चूंकि महंगाई भत्ता इस योजना के ढाँचे का हिस्सा नहीं है, इसलिए पेंशनरों को महंगाई बढ़ने का लाभ नहीं दिया जा सकता।

पेंशन न बढ़ाने के पीछे सरकार ने सबसे बड़ा कारण ईपीएस फंड की खराब वित्तीय हालत को बताया। 2019 की एक्चुरियल वैल्यूएशन रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि फंड घाटे में चल रहा है। यानी, भविष्य में पेंशन दायित्वों को पूरा करने के लिए फंड में पर्याप्त धनराशि मौजूद नहीं है।

सरकार ने तर्क दिया कि अगर फंडिंग में वृद्धि किए बिना न्यूनतम पेंशन बढ़ाई जाती है, तो फंड का वित्तीय संतुलन बिगड़ जाएगा और पूरा सिस्टम चरमरा सकता है। वर्तमान में, सरकार बजटीय सहायता देकर किसी तरह 1,000 की न्यूनतम पेंशन का भुगतान सुनिश्चित कर रही है। इस योजना में नियोक्ता का योगदान कर्मचारी की सैलरी से 8.33 फीसद होता है, और केंद्र सरकार 15,000 की वेतन सीमा तक 1.16 फीसद का योगदान देती है। मौजूदा वित्तीय स्थिति इतनी बड़ी वृद्धि का बोझ उठाने की अनुमति नहीं देती है।

ईपीएस-95 देश का सबसे बड़ा पेंशन सिस्टम है, जिससे 80 लाख से अधिक बुजुर्ग जुड़े हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से निजी क्षेत्र में अपनी पूरी जिंदगी खपाई है। 2014 में 1,000 न्यूनतम पेंशन तय की गई थी, जो 10 साल बाद भी समान है, जबकि महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि 7,500 की पेंशन के लिए फंडिंग मॉडल में मूलभूत बदलाव आवश्यक हैं। इसके लिए या तो नियोक्ताओं का योगदान बढ़ाना होगा या फिर केंद्र सरकार को अपनी सब्सिडी में भारी वृद्धि करनी होगी। जब तक फंडिंग मॉडल में यह ढांचागत परिवर्तन नहीं होता, तब तक निजी पेंशनरों की बड़ी वृद्धि की उम्मीदें अधूरी ही रहेंगी।