अगले डीजीपी पद पर अटकलबाजी का दौर
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दौड़ में एमएस भाटिया आगे हैं
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प्रशांत सिंह का नाम दूसरे नंबर पर
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अंतिम फैसला हेमंत सोरेन खुद ही लेंगे
राष्ट्रीय खबर
रांची: झारखंड के पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता ने मंगलवार देर शाम अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यद्यपि सरकार की ओर से उनके इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि तुरंत नहीं की गई है, सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह कदम उठाया है। इस इस्तीफे के बाद अब झारखंड पुलिस के अगले प्रमुख की नियुक्ति को लेकर राज्य के प्रशासनिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
नए डीजीपी पद की दौड़ में आईपीएस एमएस भाटिया और आईपीएस प्रशांत सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वर्तमान समीकरणों को देखते हुए, एमएस भाटिया को वरीयता क्रम में थोड़ा आगे माना जा रहा है, जबकि प्रशांत सिंह दूसरे नंबर पर हैं। हालांकि, यह भी चर्चा है कि भाटिया की वर्तमान मुख्य सचिव से कथित निकटता उनके चयन में एक बाधा उत्पन्न कर सकती है।
अनुराग गुप्ता के इस्तीफे की खबर ने मंगलवार रात करीब 7:30 बजे तब जोर पकड़ा जब डीजीपी कार्यालय में अचानक असामान्य हलचल देखी गई। कार्यालय बंद होने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों की आवाजाही शुरू हो गई और स्वयं डीजीपी अनुराग गुप्ता भी कार्यालय पहुंचे। इसके बाद वह कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास गए और कुछ देर बाद वापस लौटे। इन घटनाक्रमों ने उनके इस्तीफे की खबरों को बल दिया, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी। सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
गुप्ता का विवादित और संक्षिप्त कार्यकाल
अनुराग गुप्ता इसी वर्ष फरवरी 2025 में झारखंड के नियमित डीजीपी बने थे और उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक निर्धारित था। उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आपराधिक जाँच विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था, लेकिन सितंबर में उनसे एसीबी का प्रभार वापस ले लिया गया था, जिसके बाद से ही उनके पद से हटने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
वर्ष 2022 में डीजी रैंक में प्रोन्नत हुए गुप्ता को 26 जुलाई 2024 को राज्य सरकार ने प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया था, लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने उन्हें हटा दिया था। हेमंत सोरेन सरकार की सत्ता में वापसी के बाद, उन्हें 28 नवंबर 2024 को फिर से डीजीपी बनाया गया, और फिर 3 फरवरी 2025 को उन्हें नियमित डीजीपी के रूप में अधिसूचित किया गया। नियमावली के अनुसार डीजीपी का कार्यकाल दो वर्ष का होता है, लेकिन इस्तीफे ने झारखंड पुलिस के नेतृत्व में एक बार फिर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
आईएएस विनय चौबे के मामले में अपने पिछले अनुभव को देखते हुए, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बार अत्यधिक सतर्कता बरत रहे हैं। विभाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के अनुसार, अटकलों और नामों की दौड़ के बावजूद, अंतिम निर्णय स्वयं हेमंत सोरेन ही लेंगे। मुख्यमंत्री के दिमाग में क्या समीकरण चल रहे हैं, इसका अनुमान अब उनके सबसे करीबी लोग भी नहीं लगा पा रहे हैं।