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बार बार ठोकर खाने के बाद भी सुधरने को तैयार नहीं कांग्रेसी

नेताओं की गुटबाजी से हेमंत सरकार परेशान

  • इरफान अंसारी दिल्ली दरबार हो आये

  • बंधु तिर्की और सुरेश बैठा एक मत है

  • हेमंत की राहुल गांधी से निकटता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः कांग्रेस यानी गुटबाजी और गुटबाजी के अंदर भी गुटबाजी, यह काफी पुरानी कहावत है। वर्तमान घटनाक्रम बताते हैं कि तमाम किस्म की ठोकरें खाने के बाद भी कांग्रेस के नेता अपनी इस बीमारी से छुटकारा नहीं पा सके हैं। इसी वजह से कांग्रेसी नेताओं की गुटबाजी का खामियजा हेमंत सरकार के काम काज पर दिख रहा है।

ताजी सूचना रिम्स के लिए कांके रोड में जमीन का लेना है। इसमें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी का सकारात्मक रवैया है जबकि बंधु तिर्की और स्थानीय विधायक सुरेश बैठा जैसे नेता आदिवासियों को विस्थापित किये जाने के खिलाफ हैं। मौका भांपकर कुछ दूसरे लोग भी इस विवाद में घी डालने का काम कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश संगठन को चंगा करने की कोशिशों के बीच इस किस्म की गुटबाजी पर विराम नहीं लगा पा रहे हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक पार्टी में अपना वजन दिखाने के मकसद से इरफान अंसारी ने दिल्ली का दौरा किया था। वहां उन्होंने पार्टी के महासचिव के सी वेणुगोपाल से भेंट की है। खबर है कि बरही के पूर्व विधायक उमा शंकर अकेला भी उनके साथ थे। इस मुलाकात के विषय पर कोई औपचारिक बयान तो जारी नहीं किया गया है पर राजनीतिक हल्के में इसे अपनी पहुंच का प्रदर्शन के तौर पर आंका जा रहा है।

दूसरी तरफ बंधु तिर्की और सुरेश बैठा जैसे लोग जमीनी स्तर पर काफी मजबूत है और जाहिर है कि उनके पास अपना जनाधार होने की वजह से वह मंत्रियों को अधिक भाव देने को तैयार नहीं है। इससे पार्टी के भीतर भी अजीब असमंजस की स्थिति बन गयी है।

सरकार के काम काज पर कांग्रेस के लोगों से मिलने जुलने पर भी हेमंत सोरेन को सोच समझकर फैसला लेना पड़ रहा है। गुरुजी यानी शिबू सोरेन के बीमारी की वजह से दिल्ली में होने के कारण वह दैनंदिन कामकाज पर कम ध्यान दे पा रहे हैं पर झारखंड के तमाम नेता वहां भी उनसे मिल रहे हैं और नेताओं की मुलाकात में राजनीतिक चर्चा होना आम बात है।

अब इस बातचीत के बीच ही कांग्रेसियों की आपसी सर फुटौव्वल की स्थिति से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाहक उलझना उनके लिए फालतू की परेशानी है। फिर भी लोग मानते हैं कि स्पष्ट बहुमत और राहुल गांधी से निकटता की वजह से वह इस मामले को दिल्ली में ही सुलझा लेने की कोशिश करेंगे।