Breaking News in Hindi

पूर्वोत्तर में पूर्वी प्रचंड प्रहार का अभ्यास होगा

रक्षा प्रवक्ता जनरल महेंद्र रावत ने दी नई जानकारी

  • अरुणाचल के मेचुका में होगा अभ्यास

  • सेना के तीनों अंग इसमें शामिल होंगे

  • क्षेत्र के लिए अनेक नई परियोजनाएं

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना अरुणाचल प्रदेश के मेचुका में पूर्वी प्रचंड प्रहार नामक एक महत्वपूर्ण त्रि-सेवा अभ्यास का आयोजन करेंगी। रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि यह अभ्यास पूर्वी क्षेत्र में एकीकृत युद्ध क्षमताओं, तकनीकी अनुकूलन और परिचालन समन्वय का प्रदर्शन करेगा।

यह बहु-क्षेत्रीय एकीकरण का आकलन करेगा, जिसमें विशेष बल, मानवरहित प्रणालियाँ और नेटवर्क संचालन केंद्र यथार्थवादी उच्च-ऊंचाई वाली परिस्थितियों में समन्वय स्थापित करेंगे। यह अभ्यास संशोधित रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं (टीटीपी) का परीक्षण और सत्यापन करेगा, जो भारत के तीनों सेनाओं के एकीकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।

गजराज कोर के लेफ्टिनेंट जनरल मनीष एरी ने भारतीय सेना की नई और अधिक सख्त काउंटर-टेररिज्म डॉक्ट्रिन पर प्रकाश डाला, जिसे अब ‘न्यू नॉर्मल’ कहा जा रहा है। इसके तहत, भारत के खिलाफ किसी भी आतंकवादी हमले को ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा और इसके लिए निर्णायक मिलिट्री जवाब दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर भारतीय सेना हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहती है और देश किसी भी आतंकवादी हरकत को बर्दाश्त नहीं करेगा। सेना इस पॉलिटिकल डायरेक्शन का पालन कर रही है और नई टेक्नोलॉजी व क्षमताओं को शामिल कर रही है।

केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डोनर) ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछला दशक पूर्वोत्तर के लिए परिवर्तन का काल रहा है, जिससे यह एक भूमि से जुड़े हुए केंद्र में बदल गया है। 10 प्रतिशत सकल बजटीय सहायता नीति के माध्यम से इस क्षेत्र में 6.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि प्रवाहित की गई है।

मेघालय को इस नए फोकस का सबसे बड़ा लाभार्थी बताते हुए, उन्होंने 300 करोड़ रुपये से अधिक लागत की कई डोनर परियोजनाओं का शुभारंभ किया, जिसमें प्रधानमंत्री की पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास पहल (पीएम-देवाइन) योजना के तहत एकीकृत सोहरा सर्किट विकास की आधारशिला भी शामिल है।

डोनर मंत्रालय के अंतर्गत 221 करोड़ रुपये सहित कुल 650 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से, इसका उद्देश्य सोहरा (चेरापूंजी) को एक बहु-दिवसीय, जिम्मेदार और विरासत-आधारित पर्यटन स्थल में बदलना है। अन्य परियोजनाएँ: 166.8 किलोमीटर लंबे शिलांग-सिलचर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (22,864 करोड़ रुपये), उमरोई हवाई अड्डे का विस्तार और न्यू शिलांग सिटी परियोजना शामिल हैं। इन परियोजनाओं से पर्यटकों के खर्च में छह गुना वृद्धि होने और 4,600 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए आर्थिक सशक्तिकरण लाएगा।