ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात से तनाव का बर्फ गला
बीजिंगः एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्यापार वार्ता में बनी सहमति ने वैश्विक बाजारों को बड़ी राहत दी है। महीनों से चल रहे टैरिफ युद्ध के कारण वैश्विक आर्थिक विकास धीमा पड़ गया था और निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल था। दोनों नेताओं ने तनाव को कम करने और आगे के टैरिफ को टालने के लिए एक अल्पकालिक ‘व्यापारिक शांति’ पर सहमति व्यक्त की है।
इस समझौते के तहत, अमेरिका ने चीन के कुछ उत्पादों पर नियोजित टैरिफ को स्थगित कर दिया, जबकि चीन ने अमेरिका से कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने का वादा किया। यह सहमति इस बात का संकेत है कि दोनों देश अपने आर्थिक संबंधों को पूरी तरह से टूटने देने के बजाय, बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने के इच्छुक हैं।
हालांकि, यह समझौता व्यापार युद्ध का अंतिम समाधान नहीं है। दोनों देशों के बीच मूल विवाद अभी भी बने हुए हैं, जिनमें बौद्धिक संपदा की चोरी, प्रौद्योगिकी का जबरन हस्तांतरण, और चीन की औद्योगिक सब्सिडी नीतियां शामिल हैं। ये अधिक जटिल और संरचनात्मक मुद्दे हैं जिन पर आगे की वार्ताओं में ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
‘व्यापारिक शांति’ ने कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं के बारे में योजना बनाने और निवेश पर निर्णय लेने के लिए कुछ निश्चितता प्रदान की है। वैश्विक व्यापार पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए, यह सहमति एक स्वागत योग्य कदम है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्षों के घरेलू राजनीतिक और आर्थिक दबावों ने उन्हें समझौते की मेज पर आने के लिए प्रेरित किया।
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव और चीन में धीमी आर्थिक विकास दर दोनों नेताओं को एक समाधान खोजने के लिए प्रेरित कर रहे थे। अब ध्यान इस बात पर है कि क्या यह अल्पकालिक शांति एक व्यापक और स्थायी व्यापार समझौते का मार्ग प्रशस्त करेगी, जो बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत कर सके। वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष अपने गहरे मतभेदों को कितनी कुशलता से संभाल पाते हैं।