Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Mandla Crime: मंडला में रिश्तों का कत्ल! पिता के साथ मिलकर बेटे ने की मां की हत्या, रोंगटे खड़े कर दे... Ishaan Khatter Video: रेस्टोरेंट से बाहर निकलते ही गिराई कॉफी, सफेद पैंट हुई खराब तो पैपराजी के सामन... NSA Ajit Doval Riyadh Visit: अजीत डोभाल ने रियाद में सऊदी विदेश मंत्री और क्राउन प्रिंस के करीबियों ... Bank Holiday Today: अक्षय तृतीया के बाद आज भी बंद रहेंगे बैंक? जानें 20 अप्रैल को किन राज्यों में रह... Motorola Edge 70 Pro Launch: 22 अप्रैल को लॉन्च होगा मोटोरोला का नया फोन, 6500mAh बैटरी और 144Hz डिस... PBKS vs LSG: श्रेयस अय्यर ने छोड़े इतने कैच की टोपी से छिपाना पड़ा मुंह, शर्मिंदगी का VIDEO सोशल मीड... Chardham Yatra 2026: अक्षय तृतीया के शुभ योग में शुरू हुई चारधाम यात्रा; जानें केदारनाथ-बद्रीनाथ के ... Chatra News: चतरा में दर्दनाक हादसा, तालाब में डूबने से मां और दो बेटियों की मौत; चंद मिनट में उजड़ ... Police Action: SP की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हंसना ASI को पड़ा भारी, अनुशासनहीनता के आरोप में ... Postmaster Suicide: सट्टे के कर्ज में डूबे पोस्टमास्टर ने दोस्त के घर दी जान, लेनदारों के दबाव में ख...

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! 12 साल से कोमा में थे हरीश राणा, अब मिलेगी ‘इच्छामृत्यु’; मौत की अर्जी पर अदालत ने लगाई मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को अपने एक फैसले के तहत 31 साल के आदमी को पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दे दी, जो 12 साल से अधिक समय से कोमा में है. इसके लिए कोर्ट ने उसका आर्टिफिशियल लाइफ सपोर्ट हटा दिया. पैसिव यूथेनेशिया एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी मरीज को जान-बूझकर मरने दिया जाता है, इसके लिए उसे लाइफ सपोर्ट या जिंदा रखने के लिए जरूरी इलाज रोक दिया जाता है या हटा दिया जाता है.

देश की सबसे बड़ी अदालत ने गाजियाबाद के 32 साल के हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है. बेटे की मौत की गुहार लगाते हुए पिता ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच यह फैसला सुनाया.

इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका पर जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, “ईश्वर किसी मनुष्य से यह नहीं पूछता कि वह जीवन को स्वीकार करता है या नहीं, जीवन उसे लेना ही पड़ता है, ये Henry David Thoreau के शब्द हैं, जिनका विशेष महत्व तब उभरकर सामने आता है जब अदालतों के समक्ष यह सवाल आता है कि क्या किसी व्यक्ति को मरने का विकल्प चुनने का अधिकार है. इसी संदर्भ में विलियम शेक्सपीयर का प्रसिद्ध कथन — To be, or not to be — अर्थात् जीना या न जीना — भी इस दार्शनिक और विधिक विमर्श को गहराई प्रदान करता है.”

हरीश राणा पिछले 12 सालों से बैड पर थे और अब उन्हें इच्छामृत्यु के तहत मौत दी जाएगी. इच्छामृत्यु के तहत मौत गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार को मान्यता देने वाले 2018 के कॉमन कॉज फैसले का पहला न्यायिक कार्यान्वयन है. सुप्रीम कोर्ट के बेंच के फैसले से पहले कोर्ट की ओर से गठित 2 चिकित्सा बोर्डों ने अपनी रिपोर्ट दी थी कि हरीश के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है.

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले हरीश के माता-पिता की ओर से दाखिल याचिका के मुताबिक, वह पिछले 12 साल से ज्यादा समय से बिस्तर पर ही सांसें ले रहा है. इस दौरान हरीश को तरल भोजन दिया जाता है.