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नासा का सुपरसोनिक जेट परीक्षण सफल

अब दुनिया में हवाई यात्रा की तकनीक शायद बदलेगी

वाशिंगटनः अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हाल ही में अपने अत्याधुनिक सुपरसोनिक विमान, जिसे एक्स-59 कहा जाता है, का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है। यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है जो व्यावसायिक हवाई यात्रा के भविष्य को बदलने की क्षमता रखता है। एक्स-59 की सबसे बड़ी खासियत इसका डिज़ाइन है, जिसे ध्वनि की गति से तेज उड़ान भरने पर होने वाले सोनिक बूम को कम करने के लिए बनाया गया है।

पारंपरिक सुपरसोनिक विमान जब ध्वनि की गति को पार करते हैं, तो एक तेज धमाका होता है, जिसे सोनिक बूम कहते हैं। यह शोर इतना तीव्र होता है कि कई देशों ने ध्वनि की गति से तेज उड़ानों पर आवासीय क्षेत्रों के ऊपर प्रतिबंध लगा रखा है।

एक्स-59 को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह सोनिक बूम को एक धीमी सोनिक थंप या दबी हुई आवाज़ में बदल देता है, जो जमीन पर बहुत कम सुनाई देगी। परीक्षण उड़ानें बेहद सफल रहीं, और नासा अब इस तकनीक के व्यावसायीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। यदि यह तकनीक सफल हो जाती है, तो दुनिया भर में सुपरसोनिक उड़ानों पर लगे प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं, जिससे यात्रियों को न्यूयॉर्क से लंदन या अन्य लंबी दूरी के गंतव्यों तक बहुत कम समय में यात्रा करने का मौका मिलेगा।

यह परियोजना नासा के क्विट सुपरसोनिक टेक्नोलॉजी मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भविष्य की विमानन उद्योग की मांगों को पूरा करना है। परीक्षण के दौरान विमान ने उच्च गति पर अपेक्षित प्रदर्शन किया और ध्वनि को कम करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। नासा अब इस तकनीक पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए विभिन्न स्थानों पर उड़ानें आयोजित करने की योजना बना रहा है।

इस सफलता से विमानन उद्योग में एक नया युग शुरू हो सकता है, जहाँ सुपरसोनिक यात्रा फिर से आम हो सकती है, जैसा कि कभी कॉनकॉर्ड के दिनों में था, लेकिन इस बार शोर की समस्या के बिना। यह भारत जैसे बड़े देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जहाँ लंबी दूरी की यात्रा में लगने वाले समय को काफी कम किया जा सकता है।