Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal Election 2026: बंगाल में दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग, हिंसा और बवाल के बीच संपन्न हुआ मत... दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: खराब मौसम से प्रभावित गेहूं की भी होगी सरकारी खरीद, सिकुड़े और टूटे दानो... Guna Crime: गुना में पिता के दोस्त की शर्मनाक करतूत, मासूमों से अश्लील हरकत कर बनाया वीडियो; पुलिस न... Allahabad High Court: मदरसों की जांच पर NHRC की कार्यशैली से 'स्तब्ध' हुआ हाई कोर्ट; मॉब लिंचिंग का ... PM Modi in Hardoi: 'गंगा एक्सप्रेसवे यूपी की नई लाइफलाइन', हरदोई में बरसे पीएम मोदी— बोले, सपा-कांग्... Jabalpur Crime: 'शादी डॉट कॉम' पर जिसे समझा जीवनसाथी, वो निकला शातिर ब्लैकमेलर; फर्जी DSP बनकर 5 साल... Muzaffarpur Crime: मुजफ्फरपुर में बकरी चोरी के आरोप में युवक को खंभे से बांधकर पीटा, रिटायर्ड कृषि अ... Vande Bharat Extension: जम्मू से श्रीनगर का सफर अब और आसान, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 30 अप्रैल को द... West Bengal Election 2026: बंगाल में दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग, हिंसा और बवाल के बीच 'दीदी' या 'दा... Unnao Road Accident: उन्नाव में भीषण सड़क हादसा, मुंडन संस्कार से लौट रही बोलेरो और डंपर की टक्कर मे...

Instagram का नया AI टूल: Reels और Stories की एडिटिंग हुई बेहद आसान, अब चुटकियों में बदलें बैकग्राउंड और कलर

आज से लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा शुरू हो चुकी है. ये महापर्व चार दिनों का होता है. आज नहाय-खाय है. कल खरना होगा. परसो अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इसके बाद 28 अक्टूबर को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा संपन्न हो जाएगी. इस महापर्व में 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है. इस पर्व का भारत के कई राज्यों में विशेष महत्व है. इसमें बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश शामिल है. छठ के मौके पर भगवान सूर्य और छठी मैया पूजी जाती है.

छठ पूजा में उपायोग होने वाला हर एक वस्त्र, बर्तन और सामग्री विशेष महत्व रखती है. इन्हीं में शामिल है सूप या सुपा. सुपा छठ पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, लेकिन लोगों के मन में अक्सर ये सवाल उठता है कि छठ पूजा में पीतल का सुपा उपयोग करना सही और शुभ रहता है या बांस के सुपा का. आइए इस बारे में जानते हैं.

बांस का सुपा

छठ पूजा का व्रत संतान की वृद्धि, सफलता और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है. छठ पूजा में बांस का सुपा पौराणिक समय से ही उपायोग किया जा रहा है. बांस का सुपा पूरी तरह प्राकृतिक और सात्विक माना जाता है. मान्यता है कि जैसे आठ सप्ताह में बांस की 60 फीट ऊंचाई तेजी से बढ़ती है, वैसे ही इस बांस के सूप में व्रत की पूजा करने से संतान को जीवन में सफलता तेजी से मिलती है. बांस के सुपा में ठेकुआ, फल, और अन्य प्रसाद सजाकर अर्घ्य दिया जाता है, जिसे प्रकृति और सूर्य देव के प्रति श्रद्धा को शुद्धतम रूप में व्यक्त करना माना जाता है.

पीतल का सुपा

आधुनिक समय में छठ के व्रत के अनुष्ठान में पीतल के सूप, परात और पूजा के कलश का उपयोग भी देखा जाने लगा है. शास्त्रों में बताया गया है कि पीली चीजें सूर्य भगवान का प्रतीक हैं. पीतल या फुल्हा बर्तन भी पीला होता है. छठ व्रत में भगवान सूर्य को पीतल के सुपा में भी अर्घ्य दिया जा सकता है.

कौनसा सुपा है सही और शुभ?

दोनों ही सूप का अपना-अपना महत्व है. बांस का सुपा प्रकृति, परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक बताया जाता है, तो पीतल का सुपा वैभव और समृद्धि का प्रतीक है. परंपरागत रीति से पूजा करने के लिए बांस का सुपा शुभ और सही रहता है. वहीं पूजा में शुद्धता के साथ आधुनिकता को भी शामिल करना हो तो पीतल का सुपा शुभ रहता है.