कर्ज के भुगतान पर नये सिरे से प्रयास होंगे
न्यूयार्कः विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मांग उठाई है, जिसमें ऋण पुनर्गठन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने पर जोर दिया गया है। बंगा ने चिंता व्यक्त की है कि वर्तमान ऋण पुनर्गठन ढांचा, विशेष रूप से G20 कॉमन फ्रेमवर्क के तहत, अपनी धीमी गति और जटिलता के कारण विकासशील और गरीब देशों को उनके बढ़ते ऋण संकट से प्रभावी ढंग से बाहर निकालने में विफल रहा है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर तेज और अधिक पारदर्शी समाधानों पर काम करने का आह्वान किया है।
पारदर्शिता की यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई निम्न-आय वाले देशों का ऋण बोझ इतना बढ़ गया है कि यह उनके विकास प्रयासों और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को पटरी से उतार रहा है। ऋणदाताओं, जिनमें पारंपरिक पश्चिमी देशों के साथ-साथ चीन जैसे नए प्रमुख लेनदार भी शामिल हैं, के बीच समन्वय की कमी और ऋण की शर्तों को गोपनीय रखने की प्रवृत्ति इस प्रक्रिया को और भी धीमा कर देती है।
बंगा का तर्क है कि जब तक ऋण पुनर्गठन की शर्तों और प्रक्रियाओं को सार्वजनिक नहीं किया जाता, तब तक प्रभावित देशों के पास यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं होगा कि उन्हें सबसे अच्छा सौदा मिल रहा है।
विश्व बैंक अध्यक्ष के रूप में बंगा का ध्यान ऋण संकट से जूझ रहे देशों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करने पर केंद्रित है ताकि वे जलवायु परिवर्तन और महामारी जैसी अन्य वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक निवेश कर सकें। ऋण पुनर्गठन में पारदर्शिता से न केवल ऋण लेने वाले देशों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि निजी क्षेत्र के निवेशकों को भी बाजार में लौटने का प्रोत्साहन मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक वित्तीय प्रणाली को अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ बनाना है, जिससे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को स्थायी रूप से मजबूत होने का अवसर मिल सके।