इतनी ऊंचाई पर अचानक मौसम ने करवट ले ली
राष्ट्रीय खबर
काठमांडूः तिब्बत में माउंट एवरेस्ट के पास आए एक भयानक बर्फीले तूफान के कारण 200 से अधिक पर्वतारोही और ट्रैकर्स अभी भी फँसे हुए हैं। बचाव अभियान जारी है, लेकिन प्रतिकूल मौसम की स्थिति और अत्यधिक ऊँचाई बचाव दल के प्रयासों को गंभीर रूप से बाधित कर रही है। यह घटना क्षेत्र में पर्वतारोहण की बढ़ती लोकप्रियता के बीच मौसम की अप्रत्याशितता और हिमालय के उच्च क्षेत्रों में मौजूद खतरों को रेखांकित करती है।
शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, 350 से अधिक लोगों को बचा लिया गया है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है, लेकिन शेष 200 से अधिक लोग अभी भी फँसे हुए हैं। ये ट्रैकर्स एवरेस्ट बेस कैंप के पास या आस-पास के पर्वतारोहण मार्गों पर थे जब बर्फीले तूफान ने अचानक हमला किया।
बचाव टीमें, जिसमें स्थानीय शेरपा और अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोहण विशेषज्ञ शामिल हैं, हेलिकॉप्टरों और ज़मीन-आधारित टीमों का उपयोग कर रही हैं। हालांकि, तेज हवाएं, जमा देने वाला तापमान और लगातार बर्फबारी बचाव कार्यों को धीमा कर रही है। फँसे हुए लोगों को हाइपोथर्मिया और ऑक्सीजन की कमी (एल्टीट्यूड सिकनेस) का गंभीर खतरा है।
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि हिमालय क्षेत्र में मौसम कितना अप्रत्याशित हो सकता है। पर्वतारोहण के लिए वर्ष के कुछ विशिष्ट महीनों को ही ‘विंडो’ माना जाता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं।
अचानक आने वाले बर्फीले तूफान या हिमस्खलन अब अधिक सामान्य होते जा रहे हैं, जिससे पर्वतारोहियों के लिए सुरक्षा योजना बनाना मुश्किल हो गया है। स्थानीय अधिकारियों और पर्वतारोहण एजेंसियों ने ट्रैकर्स को अत्यधिक सतर्कता बरतने और केवल अनुभवी गाइडों का सहारा लेने की चेतावनी दी है।
इस तरह की घटनाएँ पर्वतारोहण उद्योग पर दीर्घकालिक प्रभाव डालती हैं। यह दुर्घटनाएँ न केवल पर्यटन पर असर डालती हैं, बल्कि पहाड़ों की पारिस्थितिकी और स्थानीय समुदायों पर भी दबाव डालती हैं जो बचाव प्रयासों पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं।
अधिकारियों को भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए मौसम चेतावनी प्रणालियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है। यह पर्वतारोहियों को जोखिम के बारे में अधिक जागरूक होने और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर देता है।