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बौद्ध भिक्षुओं का दल अब वाशिंगटन पहुंचा

एक सौ आठ दिनों की कठोर तपस्या का होगा अंत

  • शांति और करुणा के संदेश का मार्च

  • लगातार 23 सौ किलोमीटर पैदल यात्रा

  • साथ का कुत्ता अलोका चर्चा का विषय

वाशिंगटनः शांति, अहिंसा और वैश्विक भाईचारे का संदेश लेकर पिछले 108 दिनों से पैदल यात्रा कर रहे बौद्ध भिक्षुओं का जत्था आज अपने गंतव्य, अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. पहुंच गया है। टेक्सास के फोर्ट वर्थ से शुरू हुई यह ऐतिहासिक शांति पदयात्रा लगभग 2,300 मील का सफर तय करने के बाद आज सुबह वर्जीनिया से चेन ब्रिज पार कर डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में दाखिल हुई।

भिक्खु पन्नाकारा के नेतृत्व में शुरू हुई इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आधुनिक समाज में बढ़ते तनाव के बीच सजगता और करुणा को बढ़ावा देना है। अपनी यात्रा के दौरान, इन भिक्षुओं ने नौ राज्यों को पार किया और रास्ते में स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर शांति प्रार्थनाएं आयोजित कीं।

एक महत्वपूर्ण मांग जो इस यात्रा के साथ जुड़ी है, वह है अमेरिकी कांग्रेस से बुद्ध पूर्णिमा को संघीय अवकाश के रूप में मान्यता देने का अनुरोध करना। भिक्षुओं का मानना है कि इससे बहुसांस्कृतिक समाज में बौद्ध धर्म के शांतिपूर्ण योगदान को सम्मान मिलेगा।

आज दोपहर करीब 1:30 बजे, भिक्षुओं का वाशिंगटन नेशनल कैथेड्रल में भव्य स्वागत किया गया। यहाँ एक अंतर-धार्मिक सभा का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न धर्मों के गुरुओं ने शांति के साझा लक्ष्यों पर चर्चा की। यात्रा के दौरान भिक्षुओं के साथ रहने वाला उनका रेस्क्यू डॉग आलोक भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसे सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का प्यार मिला है।

बुधवार 11 फरवरी को इस यात्रा का अंतिम चरण होगा। सुबह कैपिटल हिल स्थित शांति स्मारक पर रुकने के बाद, दोपहर 2:30 बजे लिंकन मेमोरियल पर एक भव्य शांति समारोह आयोजित किया जाएगा। इसी के साथ इस 108 दिवसीय लंबी तपस्या का आधिकारिक समापन होगा। प्रशासन ने इस रूट पर यातायात के लिए विशेष प्रबंध किए हैं।