सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने सीबीआई जांच की मांग कर दी
राष्ट्रीय खबर
तिरुअनंतपुरमःकेरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर से जुड़े एक गंभीर सोने की चोरी के आरोप ने राज्य की राजनीति और धार्मिक मामलों को गरमा दिया है। मावेलिकारा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ नेता कोडिकुन्निल सुरेश ने इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की जोरदार मांग की है।
सुरेश ने सोमवार को चेन्गनूर में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि यह सुनियोजित चोरी केवल मंदिर के परिसर तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसे त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अधिकारियों और कुछ सदस्यों वाले एक संगठित गिरोह द्वारा अंजाम दिया गया था। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से देवस्वोम मंत्री वी.एन. वासावन और टीडीबी अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत के साथ-साथ इसमें शामिल अन्य अधिकारियों के इस्तीफे की मांग की।
यह पूरा विवाद 1998 में स्थापित की गई स्वर्ण-प्लेटेड द्वारपालका मूर्ति से जुड़ा हुआ है। सांसद सुरेश ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि जिस मूर्ति पर उस समय करोड़ों रुपये खर्च कर सोने की प्लेटिंग की गई थी, वह अब कथित तौर पर पिघलकर तांबे में बदल गई है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यह सोने की मात्रा में इतनी बड़ी कमी कैसे आई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
मामले को और अधिक रहस्यमय बताते हुए, सुरेश ने दस्तावेजों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के पास मौजूद दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से पुष्टि करते हैं कि 1998 में यूबी समूह के अध्यक्ष (विजय माल्या) द्वारा मूर्ति पर सोने की प्लेटिंग का काम किया गया था, जिस पर 1.75 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। देवस्वोम विजिलेंस रिकॉर्ड भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। इसके बावजूद, टीडीबी ने 2019 में एक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि जो धातु सौंपी गई थी, वह तांबा थी। सुरेश ने पूछा, पिनाराई के शासनकाल के दौरान 1998 में स्थापित स्वर्ण-प्लेटेड द्वारपालका मूर्ति तांबे में कैसे बदल गई?
कांग्रेस सांसद ने इस मामले में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री इस आपराधिक गिरोह को संरक्षण दे रहे हैं, जिसके कारण ही वे इस गंभीर चोरी के बावजूद चुप हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सोने की मात्रा में कमी को देखने के बावजूद, इसे दबाने का प्रयास किया गया।
सुरेश का मानना है कि इस पूरे घोटाले की सच्चाई तभी सामने आ सकती है जब हाई कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी इसकी जांच करे। उनका कहना है कि सरकार और देवस्वोम बोर्ड स्वयं इस मामले में अपराधी हैं, और वे राजनीतिक लाभ और वित्तीय अनियमितताओं के लिए आस्था और सबरीमाला का शोषण कर रहे हैं।
गौरतलब है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए, केरल हाई कोर्ट ने पहले ही इस कथित सोने की चोरी की जांच के लिए अपराध शाखा के एक अधीक्षक की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। हालांकि, कोडिकुन्निल सुरेश की सीबीआई जांच की मांग ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर खींच लिया है।