Breaking News in Hindi

वंतारा को जांच में क्लीन चिट मिली

एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट अब सार्वजनिक कर दी गयी

  • जस्टिस चेलमेश्वर की अध्यक्षता में कमेटी

  • रिपोर्ट के कुछ हिस्सों को अदालत ने पढ़ा

  • जांच दल वहां की व्यवस्था से संतुष्ट

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुजरात के जामनगर में स्थित, रिलायंस के स्वामित्व वाले वंतारा प्राणी बचाव और पुनर्वास केंद्र के कामकाज की जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने पिछले सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में पाया कि जानवरों के अधिग्रहण में कोई कानूनी गड़बड़ी नहीं थी।

पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि जानवरों का अधिग्रहण नियामक कानूनों के अनुसार किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अधिकारी सभी कानूनी अनुपालनों से संतुष्ट हैं।

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और पी.बी. वराले की पीठ ने रिपोर्ट के कुछ अंशों को पढ़ते हुए कहा, हम दिन में बाद में इस रिपोर्ट को शामिल करते हुए एक आदेश पारित करेंगे। हम एसआईटी की रिपोर्ट से संतुष्ट हैं। वंतारा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अदालत से आग्रह किया कि रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया जाए और इस विवाद को हमेशा के लिए खत्म किया जाए।

उन्होंने कहा, कुछ हद तक व्यावसायिक गोपनीयता बनाए रखना ज़रूरी है। यह सुविधा दुनिया में अपनी तरह की अकेली है। हम नहीं चाहते कि कल न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य जगहों पर इस बारे में रिपोर्ट छपें। हमें इस मुद्दे का सम्मानजनक अंत करना चाहिए।

साल्वे ने कहा कि चार साल पहले, वंतारा के लिए नियामक अनुमतियों को चुनौती देने वाली ऐसी ही एक याचिका पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने कहा, यह बार-बार नहीं हो सकता है, और रिपोर्ट की एक प्रति माँगी ताकि अगर सुधार के लिए कोई सुझाव हों, तो वंतारा के अधिकारी उनसे लाभ उठा सकें।

पीठ ने कहा, कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें हम देश का गौरव मानते हैं। हमें अनावश्यक रूप से ऐसे मुद्दे नहीं उठाने चाहिए और हंगामा नहीं करना चाहिए। हमें इस देश में कुछ चीजों को होने देना चाहिए…। हम किसी को भी इन सवालों को बार-बार उठाने की अनुमति नहीं देंगे।

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हालाँकि उन्हें रिपोर्ट की जानकारी नहीं है, लेकिन 25 अगस्त के अदालत के आदेश में एसआईटी के विचार के लिए बनाए गए सवालों में वंतारा के कामकाज के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन वंतारा को एक प्रति दी जानी चाहिए, क्योंकि यह उन्हें सुधार के लिए दिए गए सुझावों पर विचार करने में मदद कर सकती है।