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मंत्री और पूर्व विधायक के समर्थक भिड़े

जमुई में एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन में हुई भिड़ंत

राष्ट्रीय खबर

पटनाः बिहार के जमुई जिले में आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कार्यकर्ता सम्मेलन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। मंच पर ही बिहार सरकार के मंत्री सुमित कुमार और पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) संजय प्रसाद के बीच तीखी झड़प हो गई, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए और दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया।

यह पूरा मामला जमुई के चकाई विधानसभा क्षेत्र के बटिया में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामने आया। इस कार्यक्रम में जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता श्याम रजक और भवन निर्माण मंत्री जयंत राज भी शामिल थे। मंत्री सुमित कुमार, जो वर्तमान में चकाई से निर्दलीय विधायक हैं और राज्य सरकार में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी हैं, और पूर्व एमएलसी संजय प्रसाद के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर मतभेद चल रहे थे। संजय प्रसाद ने पिछली बार इसी विधानसभा सीट से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ा था। लंबे समय से चल रही यह आपसी तनातनी आज सबके सामने आ गई।

सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गई। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं ने भी मंच पर आकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को बिगड़ता देख, श्याम रजक और जयंत राज सहित कई वरिष्ठ नेता मंच से उतरकर कार्यक्रम स्थल से चले गए। इस घटना से एनडीए के भीतर चल रही गुटबाजी और आपसी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

हालांकि, हंगामे के कुछ देर बाद, मंत्री सुमित कुमार वापस मंच पर लौटे और दोबारा कार्यक्रम शुरू किया। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मंत्री सुमित कुमार और संजय प्रसाद के बीच हुई हाथापाई साफ देखी जा सकती है। इस घटना ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में गठबंधन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है।

यह दिखाता है कि कैसे निजी और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता एक ही मंच पर होने वाले कार्यक्रमों में भी तनाव पैदा कर सकती है, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े होते हैं। स्थानीय नेताओं के बीच इस तरह की झड़प, बड़े नेताओं की मौजूदगी में भी, यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर समन्वय की कमी है। इस घटना ने कार्यकर्ताओं और जनता के बीच भी एक नकारात्मक संदेश दिया है।