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तमिलनाडु में एनडीए को झटका

उपराष्ट्रपति पद पर तमिल नेता की जीत पर

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः तमिलनाडु में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), जो अप्रैल 2025 में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के शामिल होने के बाद मजबूत हुआ था, अब बिखराव की कगार पर खड़ा है। इसकी मुख्य वजह एआईएडीएमके और भाजपा के बीच बढ़ता तनाव है, जिसने गठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

एआईएडीएमके के भीतर एक आंतरिक विद्रोह ने जन्म लिया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि एआईएडीएमके के सभी पूर्व गुट एकजुट हों, लेकिन वर्तमान महासचिव एडप्पादी पलानीस्वामी (ईपीएस) इस मांग के खिलाफ हैं। इस बीच, दो प्रमुख सहयोगियों ने एनडीए से नाता तोड़ लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) के नेतृत्व वाले गुट और टी.टी.वी. दिनाकरन की पार्टी अम्मा मक्कल मुनेद्र कड़गम (एएमएमके) ने गठबंधन छोड़ दिया है। इधर तमिल नेता सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति पद का चुनाव जीता है।

यह विभाजन तब और गहरा हो गया जब दिनाकरन ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन पर अहंकार का आरोप लगाया और दावा किया कि नागेंद्रन ने उन्हें और ओपीएस को जानबूझकर गठबंधन से बाहर निकालने की कोशिश की क्योंकि वह केवल ईपीएस को ही गठबंधन में चाहते थे। दिनाकरन ने यह भी कहा कि नैनार ने ओपीएस का फोन उठाने से मना कर दिया, जिससे ओपीएस को गठबंधन छोड़ने का फैसला करना पड़ा।

भाजपा की तमिलनाडु इकाई में भी अंदरूनी कलह चल रही है। पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई और वर्तमान अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन के बीच एक तरह का शीत युद्ध चल रहा है। दिनाकरन ने अपनी हाल की टिप्पणियों में नागेंद्रन की आलोचना की, जबकि अन्नामलाई के साथ अपने अच्छे संबंधों को उजागर किया। इस तरह की टिप्पणियां नागेंद्रन की स्थिति को कमजोर करने की एक कोशिश मानी जा रही है।

फिलहाल, एआईएडीएमके पाँच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है, जिनका नेतृत्व पलानीस्वामी, दिनाकरन, पन्नीरसेल्वम, के.ए. सेंगोट्टैयन और वी.के. शशिकला कर रहे हैं। इन सभी गुटों में केवल एक ही बात समान है: भाजपा को उनका बिना शर्त समर्थन। इन नेताओं में से कई पर भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं। शशिकला को भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराया गया था, जबकि दिनाकरन और पलानीस्वामी के करीबी रिश्तेदारों पर भी केंद्रीय एजेंसियों ने छापे मारे हैं। ओपीएस के सहयोगी पर भी प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारा था।

हाल की घटनाओं से यह स्पष्ट है कि इन पाँचों में से चार नेता पलानीस्वामी को निशाना बना रहे हैं। ऐसा लगता है कि ये नेता अपने ऊपर चल रहे मामलों या भविष्य में छापे की धमकियों से बचने के लिए आपस में तालमेल बिठा रहे हैं, ताकि वे एक साथ मिलकर ईपीएस के खिलाफ खड़े हो सकें। इस तरह, तमिलनाडु का एनडीए गठबंधन गंभीर संकट से गुजर रहा है।