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जीएसटी परिषद की दो दिवसीय बैठक होगी

पूरे देश की निगाहें इस महत्वपूर्ण बैठक की तरफ लगी है

  • पहली बार सुधारों पर चर्चा होगी

  • राज्यों के घाटे का मुद्दा भी उठेगा

  • सिर्फ दो स्लैब रखने की कवायद

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद, कर स्लैब में बड़े बदलावों पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण दो-दिवसीय बैठक आयोजित करने वाली है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत अगली पीढ़ी के सुधारों को लागू करने के लिए अक्टूबर की शुरुआत की समय सीमा के करीब पहुँच रही है।

राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने पिछले महीने इस बैठक की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि राज्यों और केंद्र के अधिकारियों की यह बैठक जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक से एक दिन पहले होगी। राजस्व सचिव द्वारा जारी सूचना के अनुसार, जीएसटी परिषद की यह दो-दिवसीय बैठक 3 और 4 सितंबर को होने वाली है। यह बैठक अगस्त के अंतिम सप्ताह में मंत्रिसमूहों (जीओएम) की बैठकों में भाग लेने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों, वित्त मंत्रियों और अन्य मंत्रियों के दिल्ली आने के बाद हो रही है।

वित्त मंत्री सीतारमण की अगुवाई वाली इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आम इस्तेमाल की वस्तुओं और जन कल्याणकारी सेवाओं पर करों में कटौती पर चर्चा करना है।

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए संबोधन के दो हफ्ते बाद हो रही है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आम आदमी के लिए एक तोहफे के रूप में इस साल दिवाली तक जीएसटी व्यवस्था में सुधारों के अगले बड़े चरण की घोषणा की थी।

केंद्र सरकार ने जीएसटी के मौजूदा कई स्लैबों – 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत – को एक सरल और व्यापक ढांचे में बदलने का सुझाव दिया है। इस नए ढांचे के तहत केवल दो स्लैब होंगे – 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत।

इसके अलावा, पाप और अवगुण वाली वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की एक विशेष दर रखने का भी सुझाव दिया गया है। इन प्रस्तावित बदलावों से जीएसटी प्रणाली को और अधिक कुशल और सरल बनाने की उम्मीद है, जिससे व्यापार और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिल सके।

हालांकि, राज्यों ने बुनियादी वस्तुओं पर जीएसटी में कटौती के संबंध में दो प्रमुख चिंताएं उठाई हैं। पहली चिंता यह है कि कर में कमी के बाद राजस्व के नुकसान की भरपाई कैसे होगी। राज्यों को डर है कि कर दरों में कमी से उनके राजस्व में भारी गिरावट आ सकती है, और केंद्र सरकार से मिलने वाली क्षतिपूर्ति को लेकर उन्हें स्पष्टता चाहिए।

दूसरी प्रमुख चिंता यह है कि क्या जीएसटी दरों में कटौती का लाभ अंतिम लाभार्थी, यानी आम आदमी तक पहुँच पाएगा। राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कंपनियों या व्यापारियों द्वारा कीमतों में कमी की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को सीधे लाभ मिल सके। अक्सर ऐसा देखा गया है कि कर कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच पाता है।

जीएसटी परिषद की इस आगामी बैठक में इन दोनों चिंताओं पर विस्तार से चर्चा होने की पूरी संभावना है। राज्यों के प्रतिनिधि इन मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और केंद्र सरकार से समाधान की उम्मीद करेंगे। यह बैठक केवल कर स्लैब में बदलाव तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह जीएसटी प्रणाली के भविष्य की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

दिवाली तक सुधारों को लागू करने की समय सीमा को देखते हुए, यह बैठक और भी अधिक दबाव और महत्व रखती है, क्योंकि इसमें लिए गए निर्णय करोड़ों भारतीय नागरिकों और व्यवसायों को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे।