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देश का चालीस फीसद धन तीन सौ लोगों के पास

लाल किला से नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद ही रिपोर्ट आयी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारत 1.4 अरब लोगों का देश है। जीडीपी करीब 4 ट्रिलियन डॉलर है। इस हिसाब से भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय करीब 20 हजार रुपये है। लेकिन अगर हम देश के सबसे अमीर 1 फीसदी लोगों पर गौर करें तो आंकड़े बदल जाएंगे। एक रिपोर्ट से पता चलता है कि इस 1 फीसदी यानी 300 परिवारों के पास करीब 1.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की संपत्ति है।

रुपये के लिहाज से यह 140 ट्रिलियन से ज्यादा है, जो भारत की जीडीपी का 40 फीसदी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि रिलायंस समूह के मुखिया मुकेश अंबानी ने 2025 में भारत के सबसे अमीर परिवार का खिताब बरकरार रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक अंबानी परिवार की कुल संपत्ति 28 लाख करोड़ रुपये है।

देश की जीडीपी का 12 फीसदी हिस्सा अकेले अंबानी परिवार के हाथ में है। अडानी परिवार की संपत्ति 14.01 लाख करोड़ रुपये है। यानी इस समय अडानी परिवार के पास अंबानी परिवार से दोगुनी संपत्ति है। यानी पहले पांच सबसे अमीर परिवारों के पास 60 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है।

अंबानी परिवार की संपत्ति पिछले एक साल में 10 फीसदी बढ़ी है। पिछले साल की तरह इस बार भी मुकेश अंबानी और उनके परिवार ने देश के नंबर एक सबसे अमीर कारोबारी परिवार का खिताब बरकरार रखा है। पहली पीढ़ी के उद्योगपति परिवारों में गौतम अडानी शीर्ष पर हैं। 20 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ कुमार मंगलम बिड़ला परिवार की संपत्ति 6.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

नतीजतन, वे एक कदम ऊपर चढ़कर बहु-पीढ़ी वाले कारोबारी परिवारों में दूसरे स्थान पर आ गए हैं। जिंदल परिवार की संपत्ति में 21 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जिंदल परिवार एक कदम ऊपर चढ़कर तीसरे स्थान पर आ गया है। बजाज परिवार फिर से एक कदम पीछे खिसककर चौथे स्थान पर आ गया है। उनकी संपत्ति में 21 फीसदी की कमी आई है।

रिपोर्ट से पता चलता है कि इन 300 परिवारों ने पिछले एक साल में हर दिन अपनी संपत्ति में 7,100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है। और 1 अरब डॉलर (करीब 8,700 करोड़ रुपये) से ज़्यादा संपत्ति वाले परिवारों की संख्या 37 बढ़कर 161 हो गई है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के तुरंत बाद, कांग्रेस ने मोदी सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है। इसका एकमात्र लक्ष्य देश में असमानता का माहौल बनाना है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने तंज कसा, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है! पिछले 11 सालों से प्रधानमंत्री बिना एक दिन भी छुट्टी लिए चंद उद्योगपतियों की तिजोरियाँ भरने में व्यस्त हैं।

विपक्ष का साफ़ कहना है कि आर्थिक प्रगति के चापलूसी भरे शब्दों का फ़ायदा आम लोगों को नहीं मिल रहा है। कांग्रेस के हथकंडे के अनुसार, भारत में असमानता का यह माहौल अब एक बड़े सामाजिक-आर्थिक संकट में बदल चुका है। सिर्फ़ पाँच उद्योगपति परिवार जीडीपी के 18 प्रतिशत यानी 60 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। केंद्र की मोदी सरकार सिर्फ़ कुछ चुनिंदा उद्योगपति मित्रों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए विदेशी, आर्थिक और औद्योगिक नीतियाँ बना रही है।