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दिमाग के दो हिस्से तय करते हैं आपका आचरण

हार मानना या आगे बढ़ना मस्तिष्क की सोच है

  • प्रोत्साहन का प्रभाव और आगे की राह

  • दो ब्रेन एरियाज़, एक महत्वपूर्ण काम

  • दिमाग की थकान और नई खोज

राष्ट्रीय खबर

रांचीः क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप मानसिक रूप से थक जाते हैं, तो आपका दिमाग कैसे यह तय करता है कि आपको हार मान लेनी चाहिए या कोशिश जारी रखनी चाहिए?

एक नए शोध से पता चला है कि मस्तिष्क के दो प्रमुख क्षेत्र मिलकर यह तय करते हैं कि हम मानसिक रूप से कितना थका हुआ महसूस करते हैं, और यह हमें बताता है कि कब हमें और प्रयास करना चाहिए या कब रुक जाना चाहिए।

यह शोध उन लोगों के लिए खास मायने रखता है जो अक्सर मानसिक थकावट, डिप्रेशन या पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) जैसी समस्याओं से जूझते हैं।

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जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और कैनेडी क्रीगर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी की, जिसमें 28 स्वस्थ स्वयंसेवकों (18 महिलाएं और 10 पुरुष, जिनकी उम्र 21 से 29 साल थी) पर फंक्शनल एमआरआई (fMRI) स्कैन के दौरान कई मेमोरी टेस्ट किए गए। इन टेस्ट्स का मकसद यह समझना था कि जब लोग मानसिक रूप से थकते हैं, तो उनके दिमाग में क्या होता है और वे कैसे निर्णय लेते हैं।

शोध के दौरान, प्रतिभागियों को अक्षरों की एक श्रृंखला दिखाई गई और उन्हें कुछ अक्षरों की स्थिति याद रखनी थी। अक्षर श्रृंखला में जितना पीछे होता था, उसे याद करना उतना ही मुश्किल होता था, जिससे मानसिक प्रयास बढ़ता था। जैसे-जैसे कार्य कठिन होते गए, उन्हें अपनी बेहतर प्रदर्शन के लिए 1 से 8 डॉलर तक के अधिक भुगतान का अवसर दिया गया। प्रतिभागियों ने हर टेस्ट से पहले और बाद में अपनी मानसिक थकावट का स्तर भी बताया।

स्टडी में पाया गया कि जब प्रतिभागियों ने मानसिक थकावट महसूस की, तो उनके दिमाग के दो खास हिस्सों में गतिविधि और कनेक्शन बढ़ गए। राइट इंसुला यह दिमाग का एक गहरा हिस्सा है जो थकावट की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। डॉर्सल लेटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स यह दिमाग के दोनों ओर के क्षेत्र हैं जो हमारी वर्किंग मेमोरी (याददाश्त का वह हिस्सा जो हमें जानकारी को अस्थायी रूप से बनाए रखने और उसे इस्तेमाल करने में मदद करता है) को नियंत्रित करते हैं। जब प्रतिभागियों ने मानसिक थकावट की सूचना दी, तो इन दोनों क्षेत्रों में गतिविधि बेसलाइन स्तर से दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई थी।

डॉ  विक्रम चिब, जो इस शोध दल का हिस्सा हैं, कहते हैं, हमारी स्टडी का मकसद मानसिक थकावट को प्रेरित करना और यह देखना था कि जब लोग थकावट महसूस करते हैं तो प्रयास करने के उनके विकल्प कैसे बदलते हैं, साथ ही दिमाग में उन जगहों की पहचान करना जहां ये निर्णय लिए जाते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिभागियों को अधिक मानसिक प्रयास करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन बहुत अधिक होने चाहिए। इसका मतलब है कि बाहरी प्रेरणाएं मानसिक प्रयास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

डॉ  चिब का कहना है कि दिमाग के ये दोनों क्षेत्र अधिक मानसिक प्रयास से बचने का निर्णय लेने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं, जब तक कि अधिक प्रोत्साहन न दिए जाएं। यह शोध पीटीएसडी और डिप्रेशन जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से जुड़ी थकावट को समझने में मदद करेगा। यह खोज मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में मानसिक थकावट से जूझ रहे लोगों के बेहतर मूल्यांकन और उपचार के नए रास्ते खोल सकती है।