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ईरान पर अमेरिकी हमला से खुश होने वाले भी जान लीजिए

वहां का विकिरण भारत तक असर डालेगा

  • बहुत दूर तक फैलता है विकिरण

  • देश की खेती पर सबसे बुरा असर

  • नदियों में फैल जाएगा इसका जहर

रजत कुमार गुप्ता

रांचीः ईरान में परमाणु ठिकाने के विनाश के बाद मौत का दूत रेडियोधर्मी विकिरण भारत तक पहुंचेगा। क्या देश हिरोशिमा की विभीषिका देखेगा? ईरान के परमाणु ठिकाने पर विनाशकारी हमला कर अमेरिका ने विजयी गोरिल्ला की तरह छाती पीटनी शुरू कर दी है। भले ही इस घटना के बाद से ईरान में विकिरण की कोई खबर नहीं आई है, लेकिन पूरा विश्व अतीत को याद कर चिंतित है। इसका उल्लेख इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि हाल ही में पाकिस्तानी परमाणु ठिकाने पर हमले को लेकर भी काफी भारतवासी काफी उत्साहित थे।

इस दुनिया ने इतिहास में तीन बार परमाणु विषाक्तता की विभीषिका देखी है, 1945 (हिरोशिमा, नागासाकी), 1986 (चेरनोबिल) और 2011 (फुकुशिमा)। माना जा रहा है कि उस जलते घाव को भड़काकर ईरान के परमाणु ठिकाने पर अमेरिका का हमला भारत समेत एशिया के अन्य देशों के लिए खतरा बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि युद्ध के चलते ईरान के परमाणु केंद्र पर हमला होता है, तो वह विकिरण न सिर्फ मध्य पूर्व को तबाह कर देगा। इस घटना में पंजाब और हरियाणा सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। ये दोनों राज्य भारत के अनाज उत्पादन और खाद्य जरूरतों में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। परमाणु प्रदूषण के कारण इस क्षेत्र की चावल की फसलें नष्ट हो जाएंगी। जिसका सीधा असर देश की खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा। दिल्ली भी इससे अछूती नहीं रहेगी।

देश की राजधानी दिल्ली पहले से ही जहरीली हवा के कारण बुरे हाल में है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में रेडियोधर्मी हवा भी जुड़ जाएगी। इसके परिणाम घातक होंगे। रेडियोधर्मी धूल पश्चिमी राज्य राजस्थान के लिए बेहद खतरनाक साबित होगी। राजस्थान के शुष्क मौसम के कारण ये रेडियोधर्मी कण जलाशयों में मिल जाएंगे।

इसका असर वहां के लोगों पर सालों तक रहेगा। गंगा के किनारे बसे उत्तर प्रदेश और बिहार भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। ये जहरीली हवा और रेडियोधर्मी कण इस क्षेत्र के पीने के पानी और इसकी मुख्य फसलों चावल और गेहूं के उत्पादन को प्रभावित करेंगे। इतना ही नहीं, इसकी रेडियोधर्मिता उत्तर में हिमालय क्षेत्र की नदियों तक फैल जाएगी।

इतना ही नहीं, परमाणु प्रदूषण से ग्लेशियर भी प्रभावित होंगे। कुल मिलाकर इस परमाणु प्रदूषण का असर न केवल भारत के प्राकृतिक पर्यावरण पर पड़ेगा, बल्कि इसकी गंभीरता से देश में खाद्यान्न संकट पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शहर दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले शहरों में से हैं।

प्रदूषण का स्तर भी बहुत अधिक है और परमाणु विषाक्तता का सीधा असर भारत की स्वास्थ्य सेवा पर पड़ेगा। रेडियोधर्मी विकिरण फैलने से कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा। इसके अलावा, भारत की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा कृषि पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र पर इसका असर भारत को आर्थिक और सामाजिक रूप से खतरे में डाल देगा।